सीजेपी नेता सौरव दास ने सोशल मीडिया पर इस फैसले को लेकर तंज कसा है। उन्होंने अग्निवीरों की सेवा अवधि दो साल बढ़ाने से जुड़ी पोस्ट शेयर करते हुए लिखा, “मोदी सरकार का एक मास्टरस्ट्रोक यू-टर्न। बेरोजगारी के संकट का सामना कर रहे युवाओं का डर बिल्कुल वास्तविक है। सरकार डरी हुई है। बहुत ज्यादा डरी हुई है।”
वहीं, सीजेपी नेता आशुतोष रांका ने भी अग्निवीर योजना पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा, “तो क्या कोई मुझे बता सकता है कि आखिर यह योजना शुरू ही क्यों की गई थी?”
अग्निवीरों के लिए सरकार का बड़ा फैसला
जानकारी के मुताबिक, केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) की प्रेस कॉन्फ्रेंस में अग्निवीरों को लेकर अहम फैसला बताया गया। इसके तहत पहले बैच के अग्निवीरों की सेवा अवधि दो साल बढ़ाई गई है।
बताया जा रहा है कि पहले अग्निवीरों में से 25 प्रतिशत को नियमित सेना में शामिल करने का प्रावधान था। अब यह आंकड़ा बढ़ाकर 75 प्रतिशत किए जाने की जानकारी सामने आई है। यह व्यवस्था दो साल के लिए बताई गई है।
इसके साथ ही सेवा अवधि बढ़ने के दौरान अग्निवीरों को पहले की तुलना में अधिक वेतन मिलने की बात भी कही गई है। हालांकि, नियमित सेना में चयन निर्धारित सैन्य मानकों और प्रक्रिया के आधार पर ही होगा।
2022 में शुरू हुआ था अग्निवीरों का पहला बैच
बता दें कि अग्निपथ योजना के तहत अग्निवीरों का पहला बैच साल 2022 में भर्ती हुआ था। इस बैच की सेवा अवधि इसी साल के अंत में पूरी होने वाली थी। ऐसे में सेवा अवधि दो साल बढ़ाने के फैसले को पहले बैच के युवाओं के लिए अहम माना जा रहा है।
सरकार के इस फैसले के बाद अग्निपथ योजना को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बहस शुरू हो गई है। जहां सरकार के फैसले को अग्निवीरों के लिए राहत के तौर पर देखा जा रहा है, वहीं विपक्ष इसे बेरोजगारी और योजना की नीतियों से जोड़कर सवाल उठा रहा है।
