राजतरंगिणी, महाभारत और अर्थशास्त्र को मिला सम्मान
केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने इंडोनेशिया के जकार्ता में आयोजित ‘मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड एशिया-पैसिफिक रीजनल रजिस्टर’ (MOWCAP) के 11वें सत्र में लिए गए इस फैसले की जानकारी दी।
संस्कृति मंत्रालय के प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर यूनेस्को के प्रमाणपत्रों की तस्वीरें साझा कर इस उपलब्धि की घोषणा की।
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) के मुताबिक, इन तीनों ऐतिहासिक ग्रंथों को सूची में शामिल करने का फैसला जकार्ता में आयोजित बैठक के दौरान लिया गया। इनकी नामांकन प्रक्रिया और दस्तावेज तैयार करने में IGNCA ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इस उपलब्धि के साथ ही यूनेस्को की इस क्षेत्रीय सूची में भारत की कुल प्रविष्टियों की संख्या बढ़कर छह हो गई है।
12वीं शताब्दी में कल्हण ने लिखी थी राजतरंगिणी
‘राजतरंगिणी’ कश्मीर के इतिहास को समझने के लिए बेहद महत्वपूर्ण ग्रंथ माना जाता है। इसे 12वीं शताब्दी में संस्कृत के विद्वान कल्हण ने लिखा था। इसका अर्थ है ‘राजाओं की नदी’।
करीब 1148 ईस्वी में रचित इस ग्रंथ में कश्मीर के राजाओं, राजनीतिक घटनाओं, शासन व्यवस्था और तत्कालीन समाज का विस्तृत वर्णन मिलता है। इसे कश्मीर के शुरुआती व्यवस्थित ऐतिहासिक वृत्तांतों में महत्वपूर्ण स्थान हासिल है।
इसकी पांडुलिपि श्रीनगर के SPS लाइब्रेरी कॉम्प्लेक्स स्थित ओरिएंटल रिसर्च लाइब्रेरी में सुरक्षित रखी गई है। इस ग्रंथ को यूनेस्को की सूची में जगह मिलना कश्मीर की ऐतिहासिक विरासत के लिए बड़ी उपलब्धि है।
महाभारत और अर्थशास्त्र को भी मिली जगह
राजतरंगिणी के अलावा भारत के दो अन्य प्राचीन ग्रंथों को भी इस सूची में शामिल किया गया है।
महाभारत: यह भारत के दो प्रमुख संस्कृत महाकाव्यों में से एक है। इसमें धर्म, दर्शन, राजनीति, नैतिकता और जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण विचारों का वर्णन मिलता है।
अर्थशास्त्र: कौटिल्य द्वारा रचित यह प्रसिद्ध ग्रंथ शासन व्यवस्था, प्रशासन, अर्थव्यवस्था, कूटनीति और राज्य संचालन की नीतियों पर आधारित है।
इन तीनों ग्रंथों को मिली मान्यता भारत की प्राचीन साहित्यिक, बौद्धिक और सांस्कृतिक विरासत के वैश्विक महत्व को दर्शाती है।
मनोज सिन्हा और उमर अब्दुल्ला ने जताई खुशी
इस उपलब्धि पर जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने खुशी जाहिर की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि यह जम्मू-कश्मीर और पूरे देश के लिए गर्व का क्षण है।
उन्होंने कहा कि राजतरंगिणी, महाभारत और अर्थशास्त्र को यूनेस्को की सूची में शामिल किया जाना केंद्र शासित प्रदेश की समृद्ध बौद्धिक विरासत का सम्मान है।
वहीं, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी जम्मू-कश्मीर के लोगों को बधाई दी। उन्होंने इस उपलब्धि को क्षेत्र की गहरी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत की महत्वपूर्ण वैश्विक पहचान बताया।
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि ये पांडुलिपियां कश्मीर की प्राचीन परंपराओं का अनमोल खजाना हैं। उन्होंने आने वाली पीढ़ियों के लिए इस ऐतिहासिक और दस्तावेजी विरासत को सुरक्षित रखने की जरूरत पर भी जोर दिया।
