UP MLC Election Result: BJP की बढ़ी चिंता! 53 हजार से ज्यादा वोट अवैध, मतपत्रों पर लिखा मिला ‘UGC Roll Back’?

उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 11 सीटों के चुनाव नतीजों ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) की चिंता बढ़ा दी है। बीजेपी ने भले ही 11 में से 6 सीटों पर जीत दर्ज की हो, लेकिन समाजवादी पार्टी (SP) ने 5 सीटें जीतकर सत्तारूढ़ दल को कड़ी चुनौती दी है। इन नतीजों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा 53,615 अवैध मतों को लेकर हो रही है। सूत्रों के मुताबिक, कई मतपत्रों पर वोट देने के बजाय ‘UGC Roll Back’ लिखा गया था। हालांकि, ऐसे मतपत्रों की वास्तविक संख्या अभी स्पष्ट नहीं है।

कुल 6,69,982 मतों में से 53,615 वोट अवैध घोषित किए गए। यानी करीब 8 फीसदी मत गिनती में शामिल नहीं हो सके। अब राजनीतिक गलियारों में सवाल उठ रहे हैं कि क्या UGC के मुद्दे पर युवाओं और सवर्ण मतदाताओं की नाराजगी का असर इन चुनावों में देखने को मिला है? क्या इसका प्रभाव 2027 के विधानसभा चुनाव में भी पड़ सकता है?

11 सीटों पर 53,615 वोट अवैध घोषित

विधान परिषद की 11 सीटों पर हुए चुनाव में कुल 6,69,982 वोट पड़े। इनमें 6,16,367 वोट वैध पाए गए, जबकि 53,615 मतपत्र अवैध घोषित कर दिए गए।

सीटवार आंकड़ों पर नजर डालें तो लखनऊ स्नातक सीट पर सबसे ज्यादा 11,233 वोट अवैध हुए। इसके बाद वाराणसी स्नातक सीट पर 9,663 और इलाहाबाद-झांसी स्नातक सीट पर 9,596 मत अमान्य घोषित किए गए।

अन्य सीटों पर अवैध मतों का आंकड़ा इस प्रकार रहा:

  • मेरठ शिक्षक सीट: 2,809
  • मेरठ स्नातक सीट: 3,976
  • गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक सीट: 2,800
  • आगरा शिक्षक सीट: 2,128
  • आगरा स्नातक सीट: 5,852
  • बरेली-मुरादाबाद शिक्षक सीट: 3,183
  • लखनऊ शिक्षक सीट: 936
  • वाराणसी शिक्षक सीट: 1,439

इतनी बड़ी संख्या में मतों का अवैध होना चुनावी चर्चा का विषय बन गया है। खासकर इसलिए क्योंकि सूत्रों के मुताबिक कुछ मतपत्रों पर UGC के विरोध में संदेश लिखे जाने की बात सामने आई है।

गोरखपुर सीट पर जीत के अंतर से नौ गुना ज्यादा अवैध वोट

इस चुनाव का सबसे दिलचस्प पहलू गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक सीट का नतीजा रहा। यहां जीत और हार का अंतर महज 307 वोट रहा, जबकि इस सीट पर 2,800 मत अवैध घोषित किए गए। यानी जीत के अंतर से करीब नौ गुना ज्यादा वोट अमान्य हुए।

हालांकि, अवैध मतों को किसी एक राजनीतिक दल के खाते में जोड़कर चुनावी नतीजों का आकलन नहीं किया जा सकता। अभी यह भी स्पष्ट नहीं है कि कितने मतपत्रों पर ‘UGC Roll Back’ लिखा गया था। इसके बावजूद अवैध मतों की बड़ी संख्या ने राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है।

सपा का दावा- 6 सीटों पर जीत रहे थे विपक्षी उम्मीदवार

समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता अभिषेक वाजपेयी ने दावा किया कि विपक्ष पांच सीटों के अलावा गोरखपुर की सीट भी जीत सकता था। उन्होंने आरोप लगाया कि गोरखपुर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शासन-प्रशासन का इस्तेमाल करके यादव प्रत्याशी को करीब 300 वोटों से हरवाने का काम किया।

वाजपेयी ने कहा कि बीजेपी ने UGC के मुद्दे पर कभी अपना रुख स्पष्ट नहीं किया, जबकि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने हमेशा स्पष्ट स्टैंड लिया है।

उन्होंने कहा कि सपा का सिद्धांत है कि दोषी बचना नहीं चाहिए और निर्दोष फंसना नहीं चाहिए। उन्होंने दावा किया कि 2027 में अखिलेश यादव मुख्यमंत्री बनने के बाद हर व्यक्ति को न्याय दिलाने का काम करेंगे।

युवाओं ने वोट के जरिए दिखाया गुस्सा- कांग्रेस

कांग्रेस प्रवक्ता अंशु अवस्थी ने भी अवैध मतों की बड़ी संख्या को सरकार के खिलाफ युवाओं की नाराजगी से जोड़ने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि बीजेपी ने युवाओं को रोजगार देने के बड़े-बड़े वादे किए, लेकिन उन्हें पूरा नहीं किया।

अंशु अवस्थी के मुताबिक, केंद्र सरकार ने दो करोड़ नौकरियों और प्रदेश सरकार ने 70 लाख नौकरियों का वादा किया था। इसके बावजूद शिक्षकों के करीब डेढ़ लाख पद खाली हैं। उन्होंने 69 हजार शिक्षक भर्ती में आरक्षण से जुड़े अभ्यर्थियों के संघर्ष का भी जिक्र किया।

2027 चुनाव से पहले बीजेपी के लिए क्या हैं संकेत?

विधान परिषद चुनाव के नतीजों और अवैध मतों की संख्या ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। बीजेपी ने 6 सीटें जीतकर बढ़त जरूर बनाई, लेकिन सपा की 5 सीटों पर जीत ने विपक्ष को भी उत्साहित किया है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या UGC के मुद्दे पर नाराजगी और युवाओं के बीच रोजगार को लेकर असंतोष 2027 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के लिए चुनौती बन सकता है? फिलहाल अवैध मतों और UGC विरोधी संदेशों के बीच सीधा संबंध साबित नहीं हुआ है, लेकिन इस मुद्दे पर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है।

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