अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि भगवान राम और श्रीकृष्ण दोनों एक ही हैं। उन्होंने अलग-अलग युगों में अपनी लीलाएं रचने के लिए अवतार लिया था। भगवान राम त्रेतायुग में आए, जबकि श्रीकृष्ण ने द्वापर युग में अवतार लिया।
उन्होंने कहा कि भक्तों में अपने आराध्य के प्रति विनोद भाव भी होता है। उदाहरण देते हुए अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि अयोध्या के लोग कहते हैं कि हमारे राम सीधे-सादे हैं, जबकि वृंदावन के भक्त कहते हैं कि हमारे आराध्य तो टेढ़े और बांसुरी वाले हैं।
अनिरुद्धाचार्य बोले- भगवान राम और कृष्ण अलग नहीं
अनिरुद्धाचार्य ने कथा के दौरान इस तरह के प्रसंगों को सामान्य बताते हुए कहा कि कई बार अयोध्या और वृंदावन के भक्तों के बीच अपने आराध्य को लेकर बहस भी हो जाती है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि भगवान राम और श्रीकृष्ण अलग-अलग हैं।
उन्होंने कहा कि धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने भी इसी भाव को व्यक्त किया था। उनकी मंशा भगवान राम और श्रीकृष्ण की तुलना करने या किसी का अपमान करने की नहीं थी। उन्होंने यह बात विनोद भाव में कही थी। अनिरुद्धाचार्य के मुताबिक, संत और कथावाचक भी कभी-कभी इस तरह की बातें करते हैं।
शिवपुरी की कथा में धीरेन्द्र शास्त्री ने दिया था बयान
दरअसल, 29 अक्टूबर को मध्य प्रदेश के शिवपुरी में कथा के दौरान धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने भगवान राम और श्रीकृष्ण की तुलना करते हुए श्रीकृष्ण के लिए ‘टेढ़े’ जैसी संज्ञा का इस्तेमाल किया था। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण के भक्तों में नाराजगी फैल गई।
मथुरा-वृंदावन के अलावा अयोध्या के कई संतों ने भी इस टिप्पणी पर आपत्ति जताई थी। संतों ने भगवान राम और श्रीकृष्ण के बीच तुलना किए जाने को लेकर नाराजगी जाहिर की और चेतावनी भी दी। धीरे-धीरे यह विवाद राजनीतिक गलियारों तक पहुंच गया।
अखिलेश यादव ने की कार्रवाई की मांग
इस विवाद में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव भी कूद पड़े थे। उन्होंने धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री के बयान पर कार्रवाई की मांग की थी। साथ ही उनके कार्यक्रमों के बहिष्कार की अपील भी की थी।
विवाद बढ़ने के बाद खुद धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने सामने आकर माफी मांगी थी। उन्होंने स्पष्ट किया था कि उनकी मंशा भगवान श्रीकृष्ण का अपमान करने की नहीं थी। उन्होंने कहा था कि भगवान राम और श्रीकृष्ण एक ही हैं।
