ट्रंप ने ‘VETO’ वाली टोपी की तस्वीर क्यों शेयर की?
मध्यावधि चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी की कमजोर होती स्थिति के बीच ट्रंप ने वीटो लिखी लाल टोपी की तस्वीर पोस्ट की। इससे पहले उन्होंने डेमोक्रेट्स को चेतावनी दी थी कि अगर वे कांग्रेस पर नियंत्रण हासिल करते हैं तो वह ‘मिस्टर वीटो’ बन जाएंगे।
ट्रंप के इस संदेश को विपक्षी पार्टी को यह याद दिलाने के तौर पर देखा जा रहा है कि संसद में बहुमत हासिल करने के बावजूद राष्ट्रपति के पास कई अहम संवैधानिक शक्तियां मौजूद हैं।
मध्यावधि चुनाव में हार से ट्रंप की कुर्सी पर असर क्यों नहीं?
अमेरिका में राष्ट्रपति का चुनाव मध्यावधि चुनाव से अलग होता है। राष्ट्रपति का चुनाव सीधे जनता करती है, जबकि मध्यावधि चुनावों में कांग्रेस के सदस्यों का चुनाव होता है।
डोनाल्ड ट्रंप ने 2024 में दूसरी बार राष्ट्रपति चुनाव जीता था। उनका मौजूदा कार्यकाल जनवरी 2029 तक चलेगा। ऐसे में मध्यावधि चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी की हार से उनका राष्ट्रपति पद अपने आप समाप्त नहीं होगा। हालांकि, कांग्रेस में विपक्ष की ताकत बढ़ने से ट्रंप के लिए अपने एजेंडे को लागू करना मुश्किल हो सकता है।
क्या है अमेरिका के राष्ट्रपति की VETO पावर?
अमेरिकी संविधान राष्ट्रपति को वीटो यानी किसी विधेयक को कानून बनने से रोकने की शक्ति देता है। संविधान के अनुच्छेद-1, धारा-7 में इसका प्रावधान किया गया है।
जब अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदन किसी विधेयक को पास कर देते हैं, तो उसे राष्ट्रपति के पास मंजूरी के लिए भेजा जाता है। राष्ट्रपति चाहें तो उस विधेयक पर हस्ताक्षर करने के बजाय उसे आपत्तियों के साथ वापस कांग्रेस को भेज सकते हैं। इसे सामान्य वीटो कहा जाता है।
इसका मतलब है कि कांग्रेस में डेमोक्रेट्स का बहुमत होने के बावजूद ट्रंप किसी विधेयक को रोकने के लिए वीटो का इस्तेमाल कर सकते हैं।
क्या कांग्रेस राष्ट्रपति के वीटो को पलट सकती है?
अमेरिकी राष्ट्रपति की वीटो शक्ति असीमित नहीं है। संविधान के मुताबिक, अगर कांग्रेस के प्रतिनिधि सभा और सीनेट दोनों सदनों में दो-तिहाई सदस्य किसी विधेयक के समर्थन में मतदान करते हैं, तो राष्ट्रपति के वीटो को खारिज किया जा सकता है।
यानी राष्ट्रपति के वीटो के बावजूद कोई विधेयक कानून बन सकता है, बशर्ते कांग्रेस में उसे पर्याप्त समर्थन मिले।
10 दिन का क्या है नियम?
अमेरिकी संविधान में राष्ट्रपति के लिए विधेयक पर फैसला लेने की समय सीमा भी तय की गई है। अगर राष्ट्रपति को विधेयक मिलने के बाद 10 दिनों (रविवार को छोड़कर) के भीतर वह उस पर हस्ताक्षर नहीं करते और उसे वापस भी नहीं भेजते, तो वह कानून बन जाता है।
हालांकि, अगर इस अवधि के दौरान कांग्रेस का सत्र समाप्त हो जाता है और विधेयक वापस भेजना संभव नहीं होता, तो राष्ट्रपति की निष्क्रियता से विधेयक कानून नहीं बनता। इसे पॉकेट वीटो कहा जाता है।
