UP Politics: 2027 से पहले लखनऊ के रमाबाई मैदान में दिखेगी दलित राजनीति की ताकत, चंद्रशेखर और मायावती के कार्यक्रमों पर नजर

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले दलित और बहुजन राजनीति में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश तेज हो गई है। एक ओर बहुजन समाज पार्टी (BSP) के सामने अपना राजनीतिक आधार बचाए रखने की चुनौती है, तो दूसरी ओर आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद भी दलित समाज के बीच अपनी पहुंच बढ़ाने में जुटे हैं।

इस राजनीतिक खींचतान का बड़ा नजारा लखनऊ के रमाबाई आंबेडकर रैली स्थल पर देखने को मिल सकता है। चंद्रशेखर आजाद 26 नवंबर को संविधान दिवस के अवसर पर यहां ‘बहुजन स्वराज संकल्प महारैली’ करेंगे। इसके ठीक 10 दिन बाद, यानी 6 दिसंबर को बसपा भी इसी मैदान में कार्यक्रम आयोजित करेगी।

रमाबाई आंबेडकर रैली स्थल को लंबे समय से बसपा की राजनीतिक ताकत और बड़े जनसमर्थन के प्रतीक के तौर पर देखा जाता रहा है। करीब 165 एकड़ में फैले इस मैदान में लगभग पांच लाख लोगों के जुटने की क्षमता बताई जाती है। बसपा प्रमुख मायावती पहले भी यहां कई बड़ी रैलियां कर चुकी हैं।

अब चंद्रशेखर आजाद इसी मैदान में बड़ी भीड़ जुटाकर दलित और बहुजन राजनीति में अपनी ताकत दिखाने की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में दोनों दलों के कार्यक्रमों को 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले दलित वोट बैंक और बहुजन नेतृत्व पर पकड़ मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

2010 के बाद रमाबाई मैदान में बड़ी रैली की तैयारी

बसपा ने वर्ष 2010 के बाद रमाबाई आंबेडकर रैली स्थल पर कोई बड़ी रैली नहीं की है। उस समय आयोजित कार्यक्रम में पांच लाख से अधिक लोगों के जुटने का दावा किया गया था। हालांकि, पार्टी हर साल 6 दिसंबर को डॉ. भीमराव आंबेडकर के महापरिनिर्वाण दिवस पर यहां कार्यक्रम आयोजित करती रही है।

इस बार बसपा ने अपने आयोजन को लेकर तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी की ओर से दावा किया जा रहा है कि 2010 के बाद रमाबाई मैदान में होने वाला यह बड़ा आयोजन 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले उसकी राजनीतिक ताकत और जनाधार का प्रदर्शन होगा।

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