Punjab Drug Crisis: पंजाब में नशे का बढ़ता कहर, ओवरडोज से मौतें और नशा विरोधी कार्यकर्ताओं की हत्याओं ने बढ़ाई चिंता

पंजाब में नशीले पदार्थों का बढ़ता संकट गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है। ओवरडोज से मौतों के आंकड़े और नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले कार्यकर्ताओं की हत्याओं की घटनाएं राज्य में कानून-व्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर रही हैं।

पंजाब में ओवरडोज से कितने लोगों की मौत?

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार, पंजाब में नशीले पदार्थों के अत्यधिक सेवन से होने वाली मौतों में साल-दर-साल उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2021 में 78, वर्ष 2022 में 144, वर्ष 2023 में 89 और वर्ष 2024 में 106 लोगों की मौत हुई।

ये आंकड़े राज्य में नशे से जुड़ी समस्या की गंभीरता को सामने रखते हैं। हाल ही में एक व्यक्ति की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद उसके परिजनों ने ओवरडोज की आशंका जताई। इसके बाद मानसा-सिरसा मार्ग पर शव रखकर प्रदर्शन किया गया।

नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों की हत्याएं

पंजाब में नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार के खिलाफ आवाज उठाने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई जा रही है। मानसा में नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की गोली मारकर हत्या किए जाने की घटना ने इस मुद्दे को फिर चर्चा में ला दिया।

प्रस्तुत जानकारी के अनुसार, पिछले दो महीनों में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों की हत्या की तीन घटनाएं सामने आई हैं। इन घटनाओं ने अवैध नशा कारोबार के खिलाफ काम करने वाले लोगों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए हैं।

पंजाब में नशे का संकट बना बड़ी चुनौती

ओवरडोज से होने वाली मौतें और नशा विरोधी कार्यकर्ताओं पर हमलों की घटनाएं बताती हैं कि पंजाब में नशे की समस्या केवल स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है। इसका असर परिवारों, सामाजिक सुरक्षा और स्थानीय कानून-व्यवस्था पर भी पड़ता है। इस चुनौती से निपटने के लिए नशे की आपूर्ति पर नियंत्रण, प्रभावित लोगों के उपचार और शिकायतकर्ताओं की सुरक्षा जैसे पहलुओं पर ध्यान देना जरूरी है।

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