पति से उपहार में मिली थी रकम
महिला ने बताया कि वह गृहिणी है और उसकी स्वतंत्र आय का कोई स्रोत नहीं था। परिवार के वित्तीय मामलों की जिम्मेदारी उसके पति संभालते थे, जिनका निधन 17 मार्च 2023 को हुआ था।
महिला के मुताबिक, पति ने उसे और अपनी दो बेटियों को आर्थिक सुरक्षा देने के लिए यह रकम दी थी। अपने दावे के समर्थन में उसने बैंक स्टेटमेंट, हलफनामा, बेटियों के हलफनामे, पति का मृत्यु प्रमाणपत्र और अन्य वित्तीय दस्तावेज पेश किए।
बैंक खाते में जमा 60.07 लाख रुपये पर क्यों उठा सवाल?
यह मामला वित्त वर्ष 2015-16 से संबंधित था। आयकर विभाग को जानकारी मिली थी कि महिला के बैंक ऑफ महाराष्ट्र के बचत खाते में करीब 60.07 लाख रुपये नकद जमा किए गए थे। इसके बाद विभाग ने रकम के स्रोत की जानकारी मांगते हुए नोटिस जारी किया।
शुरुआत में महिला की ओर से नोटिसों का जवाब नहीं दिया गया। बाद में उसने आयकर रिटर्न दाखिल किया, जिसमें 12 हजार रुपये की आय घोषित की गई। महिला ने इसके बाद स्पष्ट किया कि बैंक खाते में जमा रकम उसकी अपनी कमाई नहीं, बल्कि पति से मिला उपहार थी।
ITAT ने महिला को कैसे दी राहत?
मामला आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण की पुणे बेंच के सामने पहुंचा। न्यायाधिकरण ने महिला के स्पष्टीकरण और उसके द्वारा पेश किए गए दस्तावेजों पर विचार किया। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, न्यायाधिकरण ने रकम के स्रोत को स्वीकार करते हुए 60 लाख रुपये की टैक्स बढ़ोतरी हटाने का निर्देश दिया।
इस मामले में बैंक रिकॉर्ड और परिवार के सदस्यों के हलफनामों जैसे दस्तावेज अहम रहे। यह फैसला संबंधित मामले के तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर दिया गया।
बैंक खाते में बड़ी रकम जमा हो तो क्या करें?
बैंक खाते में बड़ी रकम जमा होने पर आयकर विभाग उसके स्रोत के बारे में जानकारी मांग सकता है। ऐसे में रकम कहां से आई, किसने दी और किस उद्देश्य से दी गई, इससे जुड़े दस्तावेज सुरक्षित रखना उपयोगी होता है।
यदि पैसा परिवार के किसी सदस्य से उपहार में मिला है, तो बैंक स्टेटमेंट, उपहार से जुड़े प्रमाण और रकम देने वाले व्यक्ति की वित्तीय स्थिति के दस्तावेज मददगार हो सकते हैं। आयकर विभाग का नोटिस मिलने पर समय पर जवाब देना और जरूरत पड़ने पर कर विशेषज्ञ से सलाह लेना भी महत्वपूर्ण है।
