सनातन धर्म को लेकर बाबा रामदेव का बयान
बाबा रामदेव ने सनातन धर्म को सर्वश्रेष्ठ बताते हुए कहा कि इसमें किसी का अपमान करने की शिक्षा नहीं दी गई है। उन्होंने धार्मिक ग्रंथों और मनुस्मृति का उल्लेख करते हुए दावा किया कि सनातन परंपरा में महिलाओं और शूद्रों का अपमान नहीं है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विदेशी ताकतों ने समाज में फूट डालने की कोशिश की और जाति के नाम पर भेदभाव की दीवारें खड़ी की गईं। उनके इन बयानों में जाति व्यवस्था और धार्मिक परंपराओं को लेकर उनकी व्याख्या सामने आई।
‘ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र गुणों से जुड़े शब्द’
रामदेव ने कहा कि ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र को केवल जातिसूचक शब्दों के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने इन शब्दों की व्याख्या करते हुए कहा कि जो अज्ञान दूर करे, वह ब्राह्मण है; जो अन्याय का विरोध करे, वह क्षत्रिय है; जो अभाव दूर करे, वह वैश्य है; और जो समाज में स्वच्छता एवं शुचिता स्थापित करे, वह शूद्र है।
उनके मुताबिक, बाद के दौर में जाति के आधार पर भेदभाव बढ़ा। उन्होंने कहा कि समाज में विभाजन पैदा करने के बजाय समानता और आपसी सम्मान को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
‘जहां वेद हैं, वहां भेदभाव नहीं हो सकता’
बाबा रामदेव ने कहा कि भेदभाव वेदों और सनातन धर्म की भावना के विरुद्ध है। उन्होंने भारतीय संविधान में समानता के सिद्धांत का उल्लेख करते हुए कहा कि सत्य और न्याय को सर्वोच्च महत्व दिया जाना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक स्तर पर समाज में विभाजन को बढ़ावा मिला और राजनीतिक लोगों ने भी इसे संरक्षण दिया। रामदेव ने लोगों से आपसी मतभेदों और भेदभाव की दीवारों को दूर करने की अपील की।
धर्म परिवर्तन और भगवान को लेकर भी दिया बयान
प्रेस कॉन्फ्रेंस में रामदेव ने दावा किया कि ऋषियों की संतानों में से करीब 50 प्रतिशत लोग धर्म से दूर हो गए और कुछ ने इस्लाम या ईसाई धर्म अपना लिया। हालांकि, इस दावे के समर्थन में प्रस्तुत जानकारी में कोई स्वतंत्र आंकड़ा या स्रोत नहीं दिया गया है।
उन्होंने भगवान को लेकर की जाने वाली आलोचनाओं पर भी टिप्पणी की और आरोप लगाया कि कुछ लोग एक ओर भगवान के अस्तित्व पर सवाल उठाते हैं, तो दूसरी ओर उनके बारे में नकारात्मक आरोप लगाते हैं।
