हरि सिंह ढिल्लो की जीत के पीछे शिक्षकों से सीधा जुड़ाव
बरेली-मुरादाबाद शिक्षक एमएलसी चुनाव में डॉ. हरि सिंह ढिल्लो की जीत के पीछे शिक्षकों से उनका लगातार संपर्क बड़ी वजह माना जा रहा है। पिछले छह सालों में वह बरेली और मुरादाबाद मंडल के अलग-अलग जिलों में शैक्षिक संस्थानों तक पहुंचे और शिक्षकों से मुलाकात करते रहे। उनका नारा ‘नाम है हरि सिंह ढिल्लो, जब चाहो आकर मिल लो’ भी काफी लोकप्रिय हुआ। शिक्षकों के बीच उनकी सहजता और समस्याओं को उठाने की छवि ने उन्हें चुनाव में मजबूत स्थिति में पहुंचाया।
21,672 वोट पाकर ढिल्लो ने दर्ज की बड़ी जीत
बरेली के संजय कम्युनिटी हॉल में मंगलवार को बरेली-मुरादाबाद शिक्षक एमएलसी चुनाव की मतगणना हुई। सुबह आठ बजे मतपेटियां खोली गईं और इसके बाद मतपत्रों की गिनती शुरू हुई। कुल 35,161 मतों की गणना के लिए आठ टेबल लगाई गई थीं। पहले राउंड से ही डॉ. हरि सिंह ढिल्लो आगे रहे। उन्हें पहले राउंड में 5,251 वोट मिले, जबकि सपा प्रत्याशी दानिश अख्तर को 816 वोट मिले।
दूसरे राउंड के बाद ढिल्लो को 10,222 वोट मिल चुके थे और सपा प्रत्याशी 1,675 वोटों पर थे। तीसरे राउंड में भाजपा प्रत्याशी की बढ़त 12,248 वोट हो गई। चौथे राउंड के बाद उनकी जीत लगभग तय मानी जाने लगी और समर्थकों ने जश्न शुरू कर दिया। आखिर में डॉ. ढिल्लो को कुल 21,672 वोट मिले, जबकि दानिश अख्तर को 3,996 वोट हासिल हुए। इस तरह भाजपा प्रत्याशी ने 17,676 वोटों से जीत दर्ज की।
जीत के बाद शिक्षकों के सम्मान और एजुकेशन एक्ट पर जोर
जीत के बाद डॉ. हरि सिंह ढिल्लो ने कहा कि यह उनकी व्यक्तिगत जीत नहीं, बल्कि पूरे शिक्षक समुदाय की जीत है। उन्होंने कहा कि अब शिक्षकों के सम्मान को बढ़ाने के लिए एजुकेशन एक्ट लागू कराने की दिशा में काम करेंगे। ढिल्लो के मुताबिक, उन्होंने हमेशा शिक्षकों के मुद्दे मुख्यमंत्री के सामने उठाए हैं और मुख्यमंत्री भी सार्वजनिक मंच से इस बात का जिक्र कर चुके हैं।
सपा प्रत्याशी ने लगाया फर्जी वोटिंग का आरोप
चुनाव में हार के बाद सपा प्रत्याशी हाजी दानिश अख्तर ने मतदान में गड़बड़ी के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि वोटर लिस्ट तैयार करने के चरण से ही अनियमितताएं शुरू हो गई थीं। दानिश अख्तर ने अमरोहा जिले के मंडी धनौरा में फर्जी वोटिंग पकड़े जाने का दावा भी किया। उन्होंने कहा कि इस मामले की जानकारी अधिकारियों को दी गई थी। हालांकि, ये आरोप सपा प्रत्याशी के हैं।
शिक्षक संगठनों की राजनीति को लगा झटका
इस चुनाव में शिक्षक संगठनों की राजनीतिक पकड़ कमजोर होती नजर आई। पहले शिक्षक एमएलसी चुनावों में शिक्षक संघों के उम्मीदवारों का दबदबा रहता था, लेकिन भाजपा और सपा जैसी बड़ी पार्टियों की सक्रियता से मुकाबला बदल गया है। चुनाव मैदान में 17 प्रत्याशी थे, लेकिन मतगणना स्थल के बाहर मुख्य रूप से भाजपा, सपा और दो शिक्षक संगठन समर्थित प्रत्याशियों के कैंप दिखाई दिए।
इस बार कुल 3,183 वोट निरस्त हुए, जबकि पिछले चुनाव में करीब 1,500 मत खारिज हुए थे। कई मतपत्रों पर निर्धारित तरीके से ‘1’ का निशान लगाने के बजाय गोला, डबल टिक, हस्ताक्षर या अन्य निशान बनाए गए थे। इससे बड़ी संख्या में वोट रद्द हो गए। बरेली-मुरादाबाद सीट के नतीजों ने साफ कर दिया कि शिक्षक एमएलसी चुनाव में अब राजनीतिक दलों की भूमिका पहले से ज्यादा अहम हो गई है।
