अब सोने की हॉलमार्किंग के लिए देने होंगे 75 रुपये
14 सितंबर 2026 को हॉलमार्किंग शुल्क में बदलाव की अधिसूचना जारी हुई थी। नए नियमों के तहत सोने के प्रत्येक आभूषण या वस्तु पर हॉलमार्किंग फीस 45 रुपये से बढ़ाकर 75 रुपये कर दी गई है। यानी इसमें 30 रुपये की बढ़ोतरी हुई है।
इसके अलावा प्रति खेप (कंसाइनमेंट) न्यूनतम 200 रुपये का शुल्क भी निर्धारित किया गया है। यह फीस ज्वेलर्स को मान्यता प्राप्त परख एवं हॉलमार्किंग केंद्रों (AHC) को देनी होगी।
क्या ग्राहकों को भी महंगे मिलेंगे सोने के गहने?
हॉलमार्किंग फीस बढ़ने से ज्वेलर्स की लागत में इजाफा हुआ है। इसका असर ग्राहकों के बिल पर भी पड़ सकता है। हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि हर ग्राहक को प्रत्येक गहने पर सीधे 30 रुपये अतिरिक्त देने ही होंगे। अंतिम कीमत पर ज्वेलर की बिलिंग और लागत तय करने की प्रक्रिया का असर होगा।
धनतेरस पर सोना खरीदने वाले ग्राहकों को गहनों की कीमत के साथ मेकिंग चार्ज, जीएसटी और अन्य शुल्कों की जानकारी भी बिल में जरूर जांचनी चाहिए।
सोने की हॉलमार्किंग क्यों है जरूरी?
सोने की शुद्धता की पहचान के लिए हॉलमार्किंग बेहद महत्वपूर्ण है। जून 2021 से देश में चरणबद्ध तरीके से सोने के आभूषणों और कलाकृतियों की हॉलमार्किंग अनिवार्य की गई है।
BIS की हॉलमार्किंग योजना में सोने की सात कैरेट श्रेणियां शामिल हैं:
- 9 कैरेट
- 14 कैरेट
- 18 कैरेट
- 20 कैरेट
- 22 कैरेट
- 23 कैरेट
- 24 कैरेट
ग्राहकों को सोना खरीदते समय BIS का निशान, सोने की शुद्धता और छह अंकों वाला HUID नंबर जरूर जांचना चाहिए।
चांदी की हॉलमार्किंग फीस में क्या बदलाव हुआ?
संशोधित नियमों के मुताबिक, चांदी की वस्तुओं की हॉलमार्किंग फीस 35 रुपये प्रति वस्तु रखी गई है। इसके लिए प्रति खेप न्यूनतम 150 रुपये का शुल्क निर्धारित है। यानी चांदी की हॉलमार्किंग फीस में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है।
