IDBI Bank Strike: आज और कल बैंक में रहेगी हड़ताल, 10 हजार से ज्यादा कर्मचारी होंगे शामिल, जानें क्या है वजह

नई दिल्ली: अगर आपका IDBI बैंक में खाता है और आप 2 या 3 नवंबर को बैंक जाकर कोई जरूरी काम निपटाने की योजना बना रहे हैं, तो आपको परेशानी हो सकती है। दरअसल, IDBI बैंक के 10 हजार से अधिक कर्मचारी दो दिनों की हड़ताल पर रहेंगे। कर्मचारियों ने बैंक के प्रस्तावित निजीकरण के विरोध में यह कदम उठाया है।

यूनाइटेड फोरम ऑफ IDBI ऑफिसर्स एंड एम्प्लॉइज ने 2 और 3 नवंबर को हड़ताल का ऐलान किया है। कर्मचारी केंद्र सरकार के उस फैसले का विरोध कर रहे हैं, जिसके तहत बैंक की बड़ी हिस्सेदारी कनाडा की कंपनी फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स की सहायक कंपनी को बेचने की मंजूरी दी गई है।

IDBI बैंक के निजीकरण का क्यों हो रहा विरोध?

यूनियन का कहना है कि IDBI बैंक कुछ साल पहले तक भारी घाटे में था, लेकिन सार्वजनिक निवेश और कर्मचारियों के प्रयासों से बैंक की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है। पिछले तीन वर्षों में बैंक ने लगातार अच्छा मुनाफा दर्ज किया है। ऐसे में मुनाफे में चल रहे बैंक का निजीकरण करना उचित नहीं है।

कर्मचारी संगठनों ने बैंक के नियंत्रण को विदेशी कंपनी को सौंपने के फैसले पर भी सवाल उठाए हैं। उनकी मांग है कि सरकार प्रस्तावित निजीकरण की प्रक्रिया को तत्काल रद्द करे।

फेयरफैक्स फाइनेंशियल को बेची जाएगी 60.72% हिस्सेदारी

14 अक्टूबर 2026 को कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स (CCEA) ने IDBI बैंक में 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इसमें केंद्र सरकार की 30.48 प्रतिशत और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की 30.24 प्रतिशत हिस्सेदारी शामिल है।

यह हिस्सेदारी कनाडा की फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स की सहायक कंपनी को बेचने का प्रस्ताव है। इसी फैसले के खिलाफ बैंक कर्मचारी संगठन विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

कर्मचारियों को क्यों सता रहा विदेशी नियंत्रण का डर?

ऑल इंडिया बैंक एम्प्लॉइज एसोसिएशन (AIBEA) और यूनाइटेड फोरम का कहना है कि यह मामला केवल बैंक के निजीकरण का नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक भारतीय बैंक के विदेशी नियंत्रण में जाने का भी है।

यूनियन का तर्क है कि जब सरकार आत्मनिर्भर भारत की बात करती है, तो देश के एक महत्वपूर्ण वित्तीय संस्थान का नियंत्रण विदेशी निवेशक को क्यों सौंपा जा रहा है? कर्मचारी संगठनों ने बैंक में जमा करीब 3.5 लाख करोड़ रुपये की सार्वजनिक बचत को लेकर भी चिंता जताई है।

आम बैंक ग्राहकों पर क्या पड़ेगा असर?

कर्मचारी संगठनों को आशंका है कि निजी और विदेशी नियंत्रण में आने के बाद बैंक का प्राथमिक उद्देश्य सार्वजनिक कल्याण के बजाय कॉर्पोरेट मुनाफा बन सकता है। इसके अलावा, भविष्य में वैश्विक आर्थिक संकट या कंपनी के प्रबंधन से जुड़ी किसी समस्या की स्थिति में भारतीय जमाकर्ताओं के हितों और बैंक की जवाबदेही को लेकर भी सवाल उठ सकते हैं।

हड़ताल के कारण बैंक की शाखाओं में नकद लेनदेन, चेक क्लियरेंस और अन्य सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। ग्राहकों को सलाह है कि बैंक जाने से पहले अपनी शाखा से सेवाओं की उपलब्धता की जानकारी जरूर ले लें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *