क्या है रक्षा अधिग्रहण परिषद की मंजूरी?
रक्षा अधिग्रहण परिषद ने इन प्रस्तावों को ‘आवश्यकता की स्वीकृति’ (AoN) दी है। इसका मतलब है कि संबंधित रक्षा उपकरणों की खरीद के लिए सैद्धांतिक प्रशासनिक मंजूरी मिल गई है। हालांकि, यह अंतिम खरीद आदेश या सभी अनुबंधों पर हस्ताक्षर होने के बराबर नहीं है। इसके बाद खरीद प्रक्रिया के अगले चरण पूरे किए जाएंगे।
भारतीय थलसेना के लिए खरीदे जाएंगे ये उपकरण
थलसेना की परिचालन क्षमता, मारक क्षमता और निगरानी व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए कई तरह के उपकरणों की खरीद के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है। इनमें शामिल हैं:
- हाई मोबिलिटी व्हीकल (HMV): कठिन इलाकों में आवाजाही और सैन्य रसद को बेहतर बनाने के लिए।
- सेल्फ-प्रोपेल्ड ट्रैक्ड गन सिस्टम: मशीनीकृत सैन्य टुकड़ियों की गतिशीलता और मारक क्षमता बढ़ाने के लिए।
- गन शॉट रिस्पॉन्स सिस्टम (GSRS): गोलीबारी की घटनाओं पर तेजी से जानकारी हासिल करने और स्थिति की निगरानी के लिए।
- लाइट मल्टी-रोल हेलीकॉप्टर (LMRH): टोही, निगरानी, युद्धक अभियानों और खोज एवं बचाव कार्यों के लिए।
- वेरी शॉर्ट-रेंज एयर डिफेंस सिस्टम (VSHORADS): कम दूरी से आने वाले हवाई खतरों का मुकाबला करने के लिए।
- काउंटर-अनमैन्ड एरियल सिस्टम (C-UAS): ड्रोन जैसे हवाई खतरों से सुरक्षा मजबूत करने के लिए।
- लंबी दूरी की अनमैन्ड एरियल सिस्टम (UAS): दूर तक निगरानी और अभियान संबंधी जरूरतों के लिए।
- सर्विलांस UAV: दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए।
- इंटीग्रेटेड सर्विलांस एंड स्ट्राइक सिस्टम: निगरानी और लक्ष्य पर कार्रवाई की क्षमताओं को बेहतर बनाने के लिए।
- लॉन्ग रेंज कामिकेज ड्रोन सिस्टम: लंबी दूरी तक लक्ष्य को निशाना बनाने की क्षमता बढ़ाने के लिए।
इन उपकरणों से थलसेना की निगरानी, वायु रक्षा, सैन्य गतिशीलता और लक्ष्य निर्धारित करने की क्षमताओं को मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
भारतीय नौसेना को भी मिलेंगे आधुनिक रक्षा सिस्टम
भारतीय नौसेना के लिए एक्टिव ऑफबोर्ड डिकॉय सिस्टम (AODS) और अन्य प्रमुख नौसैनिक प्लेटफॉर्म की खरीद को मंजूरी दी गई है।
एक्टिव ऑफबोर्ड डिकॉय सिस्टम का उद्देश्य आधुनिक एंटी-शिप मिसाइलों से बचाव की क्षमता को बेहतर बनाना है। वहीं, स्वदेशी डिजाइन और निर्माण वाले नौसैनिक प्लेटफॉर्म नौसेना की युद्धक क्षमताओं को मजबूत करने में मदद करेंगे।
वायुसेना के लिए हेलीकॉप्टर, हथियार और रडार
भारतीय वायुसेना के लिए हेलीकॉप्टर, एयर डिफेंस सिस्टम, हथियार और मोबाइल एक्स-बैंड डॉप्लर वेदर रडार सिस्टम की खरीद के प्रस्तावों को मंजूरी मिली है।
स्पेशल यूटिलिटी हेलीकॉप्टर वायुसेना की हवाई परिवहन संबंधी जरूरतों को पूरा करने में मदद करेंगे। वहीं, मोबाइल एक्स-बैंड डॉप्लर वेदर रडार से अग्रिम क्षेत्रों में मौसम की अधिक सटीक और स्थानीय स्तर पर निगरानी की जा सकेगी। इन उपकरणों से वायु रक्षा और सैन्य अभियानों की तैयारी को बेहतर बनाने का लक्ष्य है।
स्वदेशी रक्षा उद्योग को मिलेगा बढ़ावा
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इन प्रस्तावों के तहत होने वाली खरीद का करीब 82 प्रतिशत हिस्सा भारतीय उद्योग से प्राप्त करने का लक्ष्य है। इससे घरेलू रक्षा विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा मिलने और देश में रक्षा उपकरण बनाने की क्षमता मजबूत होने की उम्मीद है।
