Tamil Nadu politics: तमिलनाडु की राजनीति में पूर्व मंत्री अनबिल महेश की गिरफ्तारी के बाद मामला चर्चा में आ गया है। निजी स्कूलों से कथित तौर पर पैसे की वसूली और सरकारी मंजूरियां दिलाने के नाम पर अनियमितताओं से जुड़े इस मामले में पुलिस कई पहलुओं की जांच कर रही है। जांच एजेंसी ने आरोपों की पड़ताल के दौरान कुछ अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की है।
बीटी अरासुकुमार समेत अन्य लोगों की भूमिका की जांच
पुलिस की जांच में तमिलनाडु प्राइवेट स्कूल्स एसोसिएशन के अध्यक्ष बीटी अरासुकुमार और अन्य लोगों की भूमिका पर भी ध्यान दिया गया। मामले में पूर्व मंत्री अनबिल महेश का नाम भी आरोपी के तौर पर शामिल किया गया है। जांच एजेंसी डिजिटल उपकरणों से कथित तौर पर मिले साक्ष्यों और पूछताछ के दौरान दर्ज बयानों के आधार पर मामले की कड़ियों को जोड़ने की कोशिश कर रही है।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत भी कार्रवाई
इस मामले में पुलिस ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधान भी लगाए हैं। आरोपों के मुताबिक, जांच का एक प्रमुख पहलू निजी स्कूलों से कथित वसूली और सरकारी अनुमतियां दिलाने की प्रक्रिया में संभावित अनियमितताओं से जुड़ा है। हालांकि, अनबिल महेश ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज किया है और कानूनी कार्रवाई को चुनौती दी है। फिलहाल, आरोपों की पुष्टि होना बाकी है और मामले में अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।
मद्रास हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत याचिका खारिज
गिरफ्तारी से पहले अनबिल महेश ने मद्रास हाईकोर्ट का रुख करते हुए अग्रिम जमानत की मांग की थी। सोमवार को अदालत ने उनकी याचिका खारिज कर दी। इसके बाद चेन्नई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद मामले ने राजनीतिक और कानूनी, दोनों स्तरों पर ध्यान खींचा है।
एफआईआर रद्द कराने के लिए भी अदालत पहुंचे पूर्व मंत्री
अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के अलावा अनबिल महेश ने मामले में दर्ज प्राथमिकी यानी एफआईआर को रद्द कराने के लिए भी अदालत का रुख किया है। अब इस याचिका पर आगे होने वाली कानूनी कार्यवाही महत्वपूर्ण मानी जा रही है। मामले में अदालत का रुख और पुलिस की जांच आगे की स्थिति स्पष्ट करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
डीएमके ने TVK सरकार पर लगाए राजनीतिक आरोप
अनबिल महेश की गिरफ्तारी के बाद डीएमके ने तमिलनाडु की सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) सरकार पर निशाना साधा है। पार्टी ने आरोप लगाया कि जांच एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है। दूसरी ओर, पुलिस कथित वसूली और सरकारी मंजूरियां दिलाने के दावों की जांच कर रही है।
अब आगे क्या होगा?
फिलहाल, इस मामले में पुलिस की जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर सबकी नजरें टिकी हैं। जांच के दौरान अन्य लोगों की भूमिका सामने आती है या नहीं, यह भी अहम सवाल है। हालांकि, सभी आरोपों को अभी साबित होना बाकी है। मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच और अदालत की कार्यवाही के आधार पर ही सामने आएगा।
