अभिजीत दीपके के घर पहुंची दिल्ली पुलिस
दिल्ली पुलिस इससे पहले अभिजीत दीपके से मार्च नहीं निकालने की अपील कर चुकी थी। पुलिस की एक टीम झंडेवालान स्थित उस घर पर भी पहुंची, जहां दीपके ठहरे हुए थे। अधिकारियों के मुताबिक, करीब 15 से 20 पुलिसकर्मी उन्हें नोटिस देने पहुंचे थे। पुलिस ने कहा कि सेंट्रल पार्क के आसपास भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू है। ऐसे में बिना अनुमति मार्च निकालने से कानून-व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
कनॉट प्लेस में कड़ी सुरक्षा
‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च को देखते हुए कनॉट प्लेस और आसपास के इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई। सेंट्रल पार्क के इनर सर्कल में पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की गई। इसके बावजूद कई लोग हाथों में तिरंगा लेकर पार्क की ओर बढ़ते दिखाई दिए और नारेबाजी करते रहे।
सुरक्षा व्यवस्था के तहत कनॉट प्लेस, राजीव चौक, जंतर-मंतर, पालिका बाजार, संसद मार्ग और आसपास के संवेदनशील इलाकों पर निगरानी रखी गई। पुलिस ने कई जगह बैरिकेडिंग भी की। अधिकारियों के मुताबिक, जरूरत पड़ने पर दूसरे जिलों से अतिरिक्त पुलिसकर्मियों को भी बुलाया गया। रिपोर्ट में 6 हजार से ज्यादा पुलिसकर्मियों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) की 220 कंपनियों की तैनाती का जिक्र है।
संजय सिंह का BJP पर हमला
आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने इस मामले को लेकर बीजेपी पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी को तिरंगे से नफरत है और अब लोगों को राष्ट्रीय ध्वज फहराने से रोका जा रहा है। संजय सिंह ने अभिजीत दीपके और नेहा बोरा को हिरासत में लिए जाने पर भी सवाल उठाए। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि विरोध प्रदर्शन के चलते कारोबारियों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।
NDMC ने दो दिन के लिए बंद किया सेंट्रल पार्क
CJP के सदस्य आशुतोष रांका और सौरव दास को लेकर लगाए गए आरोपों के विरोध में अभिजीत दीपके ने शुक्रवार शाम 5 बजे तिरंगा मार्च निकालने का ऐलान किया था। इसके बाद नई दिल्ली नगर परिषद (NDMC) ने 16 और 17 अक्टूबर को कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क को आम लोगों के लिए बंद रखने का फैसला किया। इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई और पुलिस ने लोगों से पार्क की ओर नहीं जाने की अपील की।
सेंट्रल पार्क बंद करने का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा
NDMC के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर जल्द सुनवाई की मांग की गई। हालांकि, मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया। कोर्ट ने उम्मीद जताई कि सभी संबंधित पक्ष समझदारी से काम लेंगे।
सुनवाई के दौरान जस्टिस बागची ने कहा कि विरोध करने का अधिकार, कानून-व्यवस्था और छोटे दुकानदारों की आजीविका जैसे मुद्दे आपस में जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के कारण कारोबार प्रभावित होने पर दुकानदारों और उनके परिवारों को परेशानी हो सकती है।
कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि अगर प्रशासन की ओर से उठाए गए कदम जरूरत से ज्यादा सख्त पाए जाते हैं, तो वह हस्तक्षेप कर सकता है। याचिका पर 26 या 27 अक्टूबर को सुनवाई के लिए विचार किए जाने की बात भी सामने आई।
तिरंगा मार्च पर विवाद के बीच सुरक्षा और कारोबार बना अहम मुद्दा
दिल्ली में ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च को लेकर एक तरफ प्रदर्शनकारियों की मांग और हिरासत का मामला चर्चा में है, तो दूसरी तरफ सेंट्रल पार्क बंद होने से कारोबार प्रभावित होने की चिंता भी सामने आई है। अब इस पूरे मामले में पुलिस की कार्रवाई, सार्वजनिक व्यवस्था और प्रदर्शन के अधिकार को लेकर आगे की कानूनी कार्यवाही अहम रहेगी।
