UP Election 2027: यूपी कांग्रेस में प्रियंका गांधी के हाथ होगी चुनावी रणनीति की कमान, सीट बंटवारे से लेकर प्रचार तक लेंगी हर फैसला

UP Election 2027: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने अपनी रणनीति को धार देना शुरू कर दिया है। गठबंधन में सीटों के बंटवारे से लेकर चुनाव प्रचार और समितियों के गठन तक प्रियंका गांधी की भूमिका अहम रहने वाली है। पार्टी के भीतर अब बड़े फैसलों पर उनकी सहमति का इंतजार किया जाएगा। वहीं, वोट चोरी के मुद्दे पर कांग्रेस 20 नवंबर के बाद यूपी में रैलियां शुरू करने की तैयारी में है।

यूपी कांग्रेस के हर बड़े फैसले पर रहेगी प्रियंका गांधी की नजर

उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। इस बार यूपी कांग्रेस की चुनावी रणनीति में प्रियंका गांधी वाड्रा की भूमिका काफी अहम रहने वाली है। पार्टी में गठबंधन की बातचीत हो या फिर चुनाव प्रचार की योजना, हर बड़े फैसले पर उनकी नजर रहेगी। सूत्रों के मुताबिक, सीटों के बंटवारे से लेकर चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों और प्रचार की रणनीति तक प्रियंका गांधी की सहमति को जरूरी माना जा रहा है।

खास बात यह है कि कांग्रेस के जिन नेताओं ने गठबंधन में ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ने की दावेदारी पेश की है, उनकी मांगों पर भी अंतिम फैसला प्रियंका गांधी की मंजूरी के बाद ही होगा। यानी यूपी कांग्रेस में चुनावी रणनीति की कमान भले ही सीधे तौर पर प्रदेश नेतृत्व के पास दिखाई दे, लेकिन पर्दे के पीछे से बड़े फैसलों में प्रियंका की भूमिका निर्णायक रहने वाली है।

प्रियंका गांधी का यूपी से पुराना नाता, फिर बढ़ी राजनीतिक सक्रियता

प्रियंका गांधी ने उत्तर प्रदेश से ही अपनी सक्रिय राजनीति की शुरुआत की थी। उन्हें पहले पूर्वी उत्तर प्रदेश और बाद में पूरे प्रदेश का प्रभारी बनाया गया था। उस दौरान उन्होंने संगठन को मजबूत करने और पार्टी कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद बनाने पर खास ध्यान दिया था।

हालांकि, फिलहाल वह केरल की वायनाड लोकसभा सीट से सांसद हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश की राजनीति से उनका जुड़ाव लगातार बना हुआ है। प्रदेश में संगठन से जुड़े बदलाव हों या चुनावी रणनीति तैयार करने की बात, उनकी भूमिका पहले भी महत्वपूर्ण रही है। अब विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही उनकी सक्रियता और बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।

यूपी कांग्रेस नेताओं के साथ सीट बंटवारे और चुनावी समितियों पर चर्चा

प्रियंका गांधी ने हाल ही में मंगलवार को उत्तर प्रदेश कांग्रेस के नेताओं के साथ बैठक की। इस बैठक में गठबंधन के तहत सीटों के बंटवारे और विधानसभा चुनाव के लिए बनाई जाने वाली समितियों पर विस्तार से चर्चा हुई।

सूत्रों के मुताबिक, चुनाव से जुड़ी अलग-अलग समितियों में किन नेताओं को जिम्मेदारी दी जाएगी, इस पर भी बातचीत हुई है। हालांकि, इन समितियों के नाम अभी अंतिम रूप से तय नहीं हुए हैं। बताया जा रहा है कि प्रियंका गांधी की सहमति मिलने के बाद ही नामों पर मुहर लगेगी।

इससे साफ है कि कांग्रेस इस बार यूपी चुनाव में बिना ठोस तैयारी के मैदान में नहीं उतरना चाहती। पार्टी संगठन से लेकर गठबंधन तक हर स्तर पर पहले से रणनीति तैयार करने में जुटी है।

वोट चोरी के मुद्दे पर भाजपा और चुनाव आयोग को घेरेगी कांग्रेस

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस इस बार वोट चोरी के मुद्दे को बड़ा चुनावी हथियार बनाने की तैयारी में है। पार्टी का मानना है कि इस मुद्दे को लेकर जनता के बीच माहौल बनाया जा सकता है। इसी रणनीति के तहत कांग्रेस 20 नवंबर के बाद प्रदेश में रैलियां शुरू कर सकती है।

इसके लिए यूपी कांग्रेस के नेताओं ने रैली आयोजित करने के लिए अलग-अलग स्थानों की पहचान शुरू कर दी है। जगहों का चयन पूरा होने के बाद इसकी जानकारी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को दी जाएगी। इसके बाद रैलियों की तारीख और कार्यक्रम तय किए जाएंगे।

सपा के साथ गठबंधन से पहले कांग्रेस की बड़ी तैयारी

अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन करके मैदान में उतरने की तैयारी में है। हालांकि, गठबंधन की बातचीत से पहले कांग्रेस वोट चोरी के मुद्दे पर भाजपा और चुनाव आयोग को घेरना चाहती है।

पार्टी के कई बड़े नेताओं का मानना है कि इस मुद्दे पर इंडिया ब्लॉक को मिल रहे समर्थन का फायदा चुनाव में उठाया जा सकता है। दिल्ली में हुई रैली के बाद अब कांग्रेस उत्तर प्रदेश में भी इसी मुद्दे को लेकर जनता के बीच जाने की तैयारी कर रही है।

सूत्रों का दावा है कि प्रदेश में वोट चोरी के खिलाफ रैलियां आयोजित करने की पहल प्रियंका गांधी के निर्देश पर ही शुरू हुई है। ऐसे में आने वाले दिनों में यूपी कांग्रेस की राजनीति में उनकी सक्रियता और बढ़ सकती है। अब देखना होगा कि प्रियंका गांधी की रणनीति कांग्रेस को प्रदेश में कितना मजबूत कर पाती है और सपा के साथ सीटों के बंटवारे पर क्या सहमति बनती है।

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