आनंद मोहन ने नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद से हटाए जाने के फैसले को भी NDA के लिए नुकसानदेह बताया। उन्होंने कहा कि 2025 का बिहार विधानसभा चुनाव नीतीश कुमार के चेहरे पर लड़ा गया था और जनता ने उनके नाम पर NDA को समर्थन दिया था। ऐसे में उन्हें मुख्यमंत्री पद से हटाने के कारण लोगों में नाराजगी है, जिसका असर चुनावी नतीजों में दिखाई दे रहा है।
चुनावी हार पर नेतृत्व को ठहराया जिम्मेदार
आनंद मोहन ने JDU के खराब चुनावी प्रदर्शन पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी चार MLC सीटों में से केवल एक सीट जीत सकी। उन्होंने आरा-बक्सर स्थानीय प्राधिकार MLC उपचुनाव और बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में NDA की हार का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक, MLC चुनाव में NDA को आठ में से पांच सीटों पर हार का सामना करना पड़ा।
उन्होंने आरोप लगाया कि राजपूत बहुल क्षेत्रों में JDU ने एक ही जाति के दो उम्मीदवारों को टिकट दिया, जिससे पार्टी को नुकसान हुआ। आनंद मोहन ने कहा कि चुनावी हार की जिम्मेदारी मौजूदा नेतृत्व को लेनी चाहिए।
तिरहुत और सारण में निर्दलीय उम्मीदवारों का किया समर्थन
MLC चुनाव में तिरहुत स्नातक और सारण शिक्षक सीट पर JDU की हार को लेकर भी आनंद मोहन के बयान चर्चा में हैं। उन्होंने इन दोनों सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों का समर्थन किया था और दोनों उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की।
जब उनसे पूछा गया कि क्या उनके समर्थन के कारण JDU को इन सीटों पर हार मिली, तो उन्होंने कहा कि अगर पार्टी उनकी वजह से हारी है तो इसमें वह क्या कर सकते हैं। गौरतलब है कि उनकी पत्नी लवली आनंद JDU की सांसद हैं और बेटे चेतन आनंद पार्टी के विधायक हैं। इसके बावजूद आनंद मोहन ने दावा किया कि पार्टी ने उन्हें चुनाव प्रचार के लिए आमंत्रित नहीं किया।
अनंत सिंह के समर्थन में भी आए आनंद मोहन
आनंद मोहन ने मोकामा विधायक अनंत सिंह के पक्ष में भी बयान दिया। उन्होंने कहा कि अनंत सिंह के साथ जो हो रहा है, वह गलत है और इससे JDU को राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
उन्होंने 2024 में नीतीश कुमार की NDA में वापसी का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी और चेतन आनंद ने RJD के खिलाफ जाकर सरकार बनाने में अहम भूमिका निभाई थी। आनंद मोहन के मुताबिक, उस समय दोनों विधायकों का समर्थन NDA के लिए काफी महत्वपूर्ण था।
