सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इन नतीजों को 2027 के विधानसभा चुनाव से जोड़ते हुए कहा कि उनकी पार्टी ने सिर्फ पांच सीटें नहीं जीती हैं, बल्कि बीजेपी को 50 जिलों में हार का सामना करना पड़ा है। हालांकि, यह अखिलेश यादव का राजनीतिक आकलन है। MLC चुनाव के नतीजे सीधे तौर पर पूरे जिले में विधानसभा चुनाव के जनसमर्थन का आंकड़ा नहीं बताते।
2027 के चुनाव में MLC नतीजों को मुद्दा बनाएगी सपा
सपा की रणनीति इन नतीजों के जरिए प्रदेश में अपना जनाधार बढ़ने और बीजेपी की राजनीतिक पकड़ कमजोर होने का संदेश देने की है। पार्टी नेताओं का मानना है कि शिक्षक और स्नातक मतदाताओं के बीच मिले समर्थन को विधानसभा चुनाव में भी राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनाया जा सकता है।
अखिलेश यादव ने भी पांच सीटों पर जीत को पार्टी कार्यकर्ताओं और मतदाताओं के समर्थन का परिणाम बताया है। उन्होंने दावा किया कि इन चुनावों से 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए राजनीतिक माहौल तैयार हो रहा है।
बीजेपी ने 6 सीटें जीतकर बरकरार रखा पुराना रिकॉर्ड
उत्तर प्रदेश की 11 MLC सीटों में से बीजेपी ने छह और समाजवादी पार्टी ने पांच सीटों पर जीत दर्ज की। 2020 के पिछले चुनाव में बीजेपी ने छह, सपा ने तीन और निर्दलीय उम्मीदवारों ने दो सीटें जीती थीं।
इस बार सपा ने अपनी पुरानी तीन सीटों को बरकरार रखने के साथ दो अतिरिक्त सीटें अपने नाम कीं। पार्टी ने लखनऊ स्नातक और आगरा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में जीत दर्ज की। वहीं बीजेपी ने छह सीटें जीतकर अपना पिछला आंकड़ा कायम रखा।
वोटों के आंकड़ों को लेकर सपा का दावा
सपा नेताओं का दावा है कि सीटों की संख्या के अलावा कुल वोटों के मामले में भी पार्टी ने बेहतर प्रदर्शन किया है। पार्टी की ओर से दावा किया गया कि उसे कुल 1,88,808 वोट मिले, जबकि बीजेपी को 1,37,412 वोट मिले। इस हिसाब से सपा का दावा है कि उसे बीजेपी से 51,396 वोट अधिक प्राप्त हुए। हालांकि, सीटों की संख्या के लिहाज से बीजेपी छह और सपा पांच सीटों पर विजयी रही। दोनों दल इन नतीजों को अपने-अपने राजनीतिक नजरिए से देख रहे हैं।
2027 से पहले बढ़ेगी सियासी बयानबाजी
MLC चुनाव के नतीजों के बाद बीजेपी और समाजवादी पार्टी के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। सपा जहां पांच सीटों की जीत को अपने विस्तार के तौर पर पेश कर रही है, वहीं बीजेपी छह सीटों पर जीत को अपना मजबूत प्रदर्शन बता रही है।
