डिजिटल अरेस्ट का खौफनाक खेल: रिटायर्ड बिजलीकर्मी और पत्नी 25 दिन घर में रहे कैद, 69 लाख रुपये ठगे

मध्य प्रदेश के विदिशा में साइबर ठगी का हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां जालसाजों ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर रिटायर्ड बिजलीकर्मी और उनकी पत्नी को करीब 25 दिनों तक घर में कैद जैसे हालात में रखा। आरोपियों ने खुद को CBI अधिकारी बताकर बुजुर्ग को मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में फंसाने की धमकी दी और उनसे 69 लाख रुपये अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करा लिए।

मामला विदिशा के सिविल लाइन थाना क्षेत्र स्थित बंटी नगर का है। पीड़ित प्रदीप कपाड़े वर्ष 2016 में बिजली विभाग में अकाउंटेंट के पद से रिटायर हुए थे। उनके पास 5 अक्टूबर को एक फोन कॉल आया। कॉल करने वालों ने खुद को एयरटेल से जुड़ा कर्मचारी बताया और कहा कि उनके सिम कार्ड का गलत इस्तेमाल हो रहा है। आरोपियों ने आधार कार्ड के जरिए सिम वेरिफिकेशन कराने का झांसा दिया। इसी बहाने उन्होंने बुजुर्ग को अपने जाल में फंसा लिया।

नकली CBI अधिकारी बनकर मनी लॉन्ड्रिंग का डर दिखाया

शुरुआत में सिम कार्ड वेरिफिकेशन की बात करने वाले जालसाजों ने बाद में खुद को CBI अधिकारी बताना शुरू कर दिया। उन्होंने प्रदीप कपाड़े को मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में फंसाने और गिरफ्तारी की धमकी दी। कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर आरोपियों ने उन पर मानसिक दबाव बनाया।

इसके बाद वीडियो कॉल के जरिए पीड़ित पर नजर रखी जाने लगी। उन्हें निर्देश दिया गया कि वे इस मामले में किसी अन्य व्यक्ति से बात न करें और घर से बाहर भी न निकलें। इस तरह करीब 25 दिनों तक प्रदीप कपाड़े और उनकी पत्नी अपने ही घर में डिजिटल अरेस्ट जैसी स्थिति में रहने को मजबूर रहे।

मोबाइल पर बनाई नकली अदालत, वीडियो कॉल पर सुनवाई का नाटक

ठगी को असली दिखाने के लिए साइबर अपराधियों ने मोबाइल पर ही नकली अदालत का पूरा सेटअप तैयार कर दिया। पीड़ित के सामने याचिका दाखिल करने और केस की सुनवाई होने का नाटक किया गया। इस फर्जी कानूनी प्रक्रिया के जरिए आरोपियों ने बुजुर्ग को लगातार डर में रखा।

करीब 25 दिनों तक चले इस पूरे घटनाक्रम के दौरान जालसाजों ने अलग-अलग बैंक खातों में 69 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए। आरोपियों को लगा कि उनकी साजिश सफल हो गई है, लेकिन इसी बीच एक बैंक ट्रांजेक्शन होल्ड हो गया।

बैंक ट्रांजेक्शन होल्ड होने पर खुलने लगा ठगी का मामला

बैंक ट्रांजेक्शन रुकने के बाद आरोपियों ने खुद पीड़ित को साइबर ऑफिस जाने की सलाह दी। इस पूरे मामले में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर अपनाए गए तरीकों ने एक बार फिर साइबर अपराधियों की संगठित और सुनियोजित ठगी को उजागर किया है।

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की सलाह है कि किसी भी अनजान कॉल पर खुद को पुलिस, CBI या अन्य जांच एजेंसी का अधिकारी बताने वाले व्यक्ति पर भरोसा न करें। कोई भी वास्तविक जांच एजेंसी वीडियो कॉल पर किसी को डिजिटल अरेस्ट नहीं करती और न ही जांच के नाम पर निजी बैंक खातों में पैसे जमा कराने को कहती है।

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