शिवाजी साटम ने बीपी सिंह को बताया गुरु और दोस्त
‘वैरायटी इंडिया’ से बातचीत में शिवाजी साटम ने बीपी सिंह के निधन पर दुख जताया। उन्होंने कहा, “आज मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा चैप्टर खत्म हो गया।” अभिनेता के मुताबिक, बीपी सिंह न सिर्फ शानदार इंसान थे, बल्कि बेहतरीन दोस्त और शिक्षक भी थे।
शिवाजी साटम ने बताया कि वह थिएटर से आए थे और मंच पर अभिनय करना जानते थे, लेकिन कैमरे के सामने अभिनय करने की बारीकियां उन्होंने बीपी सिंह से सीखीं। उन्होंने सिखाया कि कैमरे के सामने किस तरह परफॉर्म करना है और जरूरत पड़ने पर किरदार को प्रभावशाली कैसे बनाना है।
शिवाजी के मुताबिक, बीपी सिंह ने उन्हें कैमरे पर भावनाओं और अभिनय को प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने की कला समझाई। यही वजह है कि वह उन्हें अपना गुरु मानते थे।
हार्ट सर्जरी के तीन महीने बाद लौट आए थे काम पर
शिवाजी साटम ने बीपी सिंह के काम के प्रति समर्पण को याद करते हुए बताया कि हार्ट सर्जरी के महज तीन महीने बाद ही वह दोबारा काम पर लौट आए थे। वह चेज सीक्वेंस की शूटिंग के लिए कैमरा लेकर जंगल में दौड़ते नजर आते थे।
अभिनेता ने यह भी बताया कि दूसरी सर्जरी के छह से सात महीने बाद बीपी सिंह ने 111 मिनट का एक विशेष एपिसोड तैयार किया था, जिसे लगातार एक ही शॉट में शूट किया गया था। इस दौरान वह कैमरामैन नितिन राव को पूरे शूट में मार्गदर्शन देते रहे। शिवाजी के मुताबिक, इस एपिसोड ने विश्व रिकॉर्ड बनाया था।
बीपी सिंह की यह कार्यशैली बताती है कि वह अपने काम को लेकर कितने समर्पित थे। स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के बावजूद उनका जुनून और रचनात्मकता कायम रही।
‘हमारे रिश्ते को किसी एक नाम तक सीमित नहीं किया जा सकता’
शिवाजी साटम ने बीपी सिंह के साथ अपने लंबे रिश्ते को याद करते हुए कहा कि किसी भी दोस्ती में गलतफहमियां और झगड़े हो सकते हैं, लेकिन उनके रिश्ते में बात कभी इससे आगे नहीं बढ़ी।
उन्होंने कहा कि जिंदगी के हर दौर में बीपी सिंह उनके साथ रहे। उनके रिश्ते को सिर्फ गुरु या दोस्त के रूप में परिभाषित नहीं किया जा सकता। शिवाजी के लिए बीपी सिंह ऐसे व्यक्ति थे, जिनसे उन्होंने जीवन और अभिनय दोनों के बारे में बहुत कुछ सीखा।
शिवाजी साटम बोले- बीपी सिंह को पद्मश्री मिलना चाहिए था
बीपी सिंह के योगदान पर बात करते हुए शिवाजी साटम ने कहा कि उनके जैसे व्यक्ति को पद्मश्री सम्मान मिलना चाहिए था। हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि बीपी सिंह पुरस्कारों को लेकर ज्यादा चिंतित नहीं रहते थे।
शिवाजी के मुताबिक, बीपी सिंह कहा करते थे कि इससे क्या फर्क पड़ता है, जब दर्शक उनके साथ हैं। अभिनेता ने कहा कि आज भी दर्शकों का प्यार उनके साथ है और यह अपने आप में बहुत बड़ी उपलब्धि है।
