अखिलेश का संदेश- आजम थे, आजम हैं और आजम रहेंगे
रामपुर जेल से बाहर आने के बाद अखिलेश यादव ने आजम खां के साथ अपने रिश्ते को लेकर कहा कि आजम खां पहले भी आजम थे, आज भी हैं और आगे भी आजम ही रहेंगे। उनके इस बयान को पश्चिमी उत्तर प्रदेश और रुहेलखंड की राजनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है। सपा के लिए इस इलाके में आजम खां का राजनीतिक प्रभाव महत्वपूर्ण रहा है। ऐसे में चुनाव से पहले उनसे मुलाकात और सीटों पर चर्चा को पार्टी की चुनावी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
गठबंधन की सीटों पर आजम खां से ली गई राय
अखिलेश यादव ने मीडिया से बातचीत में बताया कि गठबंधन की पार्टियों से सीटों को लेकर जो सूची मिली है, उस पर आजम खां के साथ विस्तार से चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि आजम खां ने जो महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं, उन पर काम किया जाएगा। अखिलेश ने उत्तर प्रदेश में सपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने का भरोसा भी जताया। इस बयान से संकेत मिलता है कि पार्टी उम्मीदवारों के चयन में स्थानीय समीकरणों और वरिष्ठ नेताओं की राय को ध्यान में रखना चाहती है। हालांकि, सीटों के बंटवारे और प्रत्याशियों की अंतिम सूची पर आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।
2022 में भी टिकट बंटवारे में आजम खां की थी भूमिका
आजम खां और अखिलेश यादव की मुलाकात का एक पुराना राजनीतिक संदर्भ भी है। 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले अखिलेश यादव ने सीतापुर जेल में बंद आजम खां से मुलाकात की थी। उस समय भी टिकटों के बंटवारे को लेकर चर्चा हुई थी। उपलब्ध चुनावी आंकड़ों के मुताबिक, 2022 में मुरादाबाद मंडल की 27 विधानसभा सीटों में से सपा ने 17 सीटों पर जीत दर्ज की थी। इस प्रदर्शन के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश और रुहेलखंड में पार्टी की स्थिति को लेकर आजम खां की भूमिका पर चर्चा होती रही है।
मुरादाबाद मंडल में सपा का प्रदर्शन कैसा रहा?
2022 के विधानसभा चुनाव में मुरादाबाद मंडल के अलग-अलग जिलों में सपा का प्रदर्शन इस तरह रहा था:
- मुरादाबाद: छह में से पांच सीटों पर सपा ने जीत दर्ज की।
- रामपुर: पांच में से तीन सीटें सपा के खाते में गईं।
- संभल: चार में से तीन सीटों पर सपा प्रत्याशी जीते।
- अमरोहा: चार में से दो सीटों पर सपा को सफलता मिली।
- बिजनौर: आठ में से चार सीटों पर सपा ने जीत दर्ज की।
ये आंकड़े 2022 के चुनाव के हैं। आगामी चुनाव में सीटों का समीकरण अलग हो सकता है।
रामपुर सीट पर कौन होगा सपा का उम्मीदवार?
इस मुलाकात के बाद सबसे बड़ा सवाल रामपुर विधानसभा सीट को लेकर बना हुआ है। पत्रकारों ने अखिलेश यादव से पूछा कि रामपुर से सपा किसे उम्मीदवार बनाएगी। इस पर उन्होंने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “तुम्हें क्यों बताऊं?” उनके इस जवाब से उम्मीदवार के नाम को लेकर सस्पेंस बना हुआ है। फिलहाल पार्टी की ओर से रामपुर सीट के लिए किसी प्रत्याशी के नाम की आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है।
चुनाव से पहले आजम खां की राय क्यों अहम?
अखिलेश यादव की रामपुर जेल में आजम खां से मुलाकात को केवल एक औपचारिक मुलाकात के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। गठबंधन की सीटों और उम्मीदवारों पर चर्चा के साथ यह मुलाकात सपा की चुनावी तैयारियों का भी संकेत देती है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पार्टी के पुराने जनाधार, स्थानीय नेताओं और जातीय-सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए उम्मीदवार तय करना सपा के लिए अहम होगा। अब नजर इस बात पर रहेगी कि आजम खां के सुझावों के बाद पार्टी किन चेहरों पर दांव लगाती है और रामपुर सीट पर किसे मैदान में उतारती है।
