‘सत्ताइस का संकल्प, पीडीए का प्रणपत्र’
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्टर साझा कर घोषणा पत्र जारी करने की तारीख का ऐलान किया। उन्होंने पोस्ट में लिखा, ‘सत्ताइस का संकल्प, पीडीए का प्रणपत्र।’ साथ ही बताया कि संविधान दिवस के लोकतांत्रिक अवसर पर पार्टी अपना ‘जन-मन का मैनिफेस्टो’ जारी करेगी। इस पोस्ट के साथ उन्होंने ‘पीडीए मैनिफेस्टो 2027’ हैशटैग भी इस्तेमाल किया।
पीडीए फॉर्मूले पर सपा का फोकस
अखिलेश यादव के इस ऐलान से साफ है कि आगामी विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी पीडीए यानी पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों को अपने चुनावी एजेंडे के केंद्र में रखना चाहती है। पार्टी के घोषणा पत्र में इन समुदायों से जुड़े मुद्दों को खास जगह मिलने की संभावना है। हालांकि, सपा ने अभी यह नहीं बताया है कि प्रणपत्र में कौन-कौन से वादे शामिल होंगे।
संविधान दिवस पर घोषणा पत्र जारी करने के पीछे क्या है सपा की रणनीति?
सपा ने घोषणा पत्र जारी करने के लिए संविधान दिवस की तारीख चुनी है। इससे पार्टी के संविधान और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों को चुनाव में उठाने के संकेत मिलते हैं। सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता फखरुल हसन ने कहा कि पार्टी संविधान दिवस पर प्रणपत्र जारी कर रही है, क्योंकि संविधान को बचाने की लड़ाई लगातार चल रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी देश में लोकतंत्र और संविधान को कमजोर करने की कोशिश कर रही है। उनके मुताबिक, संविधान दिवस पर घोषणा पत्र जारी करना इसी मुद्दे को सामने रखने की पार्टी की रणनीति का हिस्सा है। ये सपा प्रवक्ता का राजनीतिक आरोप है।
चुनाव से पहले जनता तक पहुंचाने की तैयारी
समाजवादी पार्टी इस बार चुनाव की तारीखों का ऐलान होने से काफी पहले अपना घोषणा पत्र जारी करने की तैयारी में है। इससे पार्टी को अपने वादों और चुनावी एजेंडे को लोगों तक पहुंचाने के लिए ज्यादा समय मिल सकता है। अब देखना होगा कि ‘जन-मन के मैनिफेस्टो’ में रोजगार, शिक्षा, किसान, सामाजिक न्याय और आम लोगों से जुड़े किन मुद्दों को जगह दी जाती है।
सपा-कांग्रेस गठबंधन और सीटों के बंटवारे पर भी नजर
उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में बीजेपी, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस समेत सभी राजनीतिक दल अपनी तैयारियों में जुटे हैं। बीजेपी अपने सहयोगी दलों के साथ चुनावी रणनीति बना रही है, जबकि सपा और कांग्रेस के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर अभी तस्वीर साफ नहीं हुई है।
राजनीतिक चर्चाओं के मुताबिक, कांग्रेस गठबंधन में 100 से ज्यादा सीटों की मांग कर सकती है। वहीं अखिलेश यादव मजबूत और जीतने की संभावना वाले उम्मीदवारों पर दांव लगाने की बात कर रहे हैं। हालांकि, दोनों दलों के बीच सीटों को लेकर अंतिम फैसला अभी सामने नहीं आया है। ऐसे में सपा के घोषणा पत्र के साथ-साथ गठबंधन की रणनीति पर भी सबकी नजर रहेगी।
