राकेश प्रताप सिंह बोले- गौरीगंज में भाजपा का विधायक बनाना है लक्ष्य
गौरीगंज के विधायक राकेश प्रताप सिंह ने कहा कि वह जनता के सुख-दुख को अपना सुख-दुख मानते हैं और लोगों के सम्मान व भरोसे को हमेशा बनाए रखेंगे। उन्होंने बताया कि वर्ष 1996 के विधानसभा चुनाव और 1998 व 1999 के लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने भाजपा की सदस्यता ली थी। बाद में राजनीतिक परिस्थितियों के चलते वह कुछ समय के लिए भाजपा से दूर हो गए और दूसरे राजनीतिक दल के साथ अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की।
राकेश प्रताप सिंह ने कहा कि समाजवादी पार्टी ने उन्हें गौरीगंज से चुनाव लड़ने का मौका दिया और क्षेत्र की जनता ने लगातार तीन बार विधायक बनाया। हालांकि, अब उनका मकसद खुद विधायक बनना नहीं, बल्कि गौरीगंज में भाजपा का विधायक जिताना है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि भाजपा का केंद्रीय और प्रदेश नेतृत्व जिस भी उम्मीदवार को टिकट देगा, उसे जिताने के लिए वह पूरी ताकत लगा देंगे।
विनोद चतुर्वेदी ने सपा की नीतियों पर उठाए सवाल
जालौन जिले की कालपी सीट से विधायक विनोद चतुर्वेदी ने कहा कि वह करीब 45 वर्षों से राजनीति में सक्रिय हैं। उन्होंने वर्ष 1982 में प्रधानी से अपनी राजनीतिक पारी शुरू की थी। बुंदेलखंड के विकास की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र वेदव्यास की जन्मभूमि है, लेकिन लंबे समय तक विकास के मामले में पिछड़ा रहा।
विनोद चतुर्वेदी के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बुंदेलखंड को विकास के नए अवसर मिले हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं, औद्योगिक विकास और एक्सप्रेसवे जैसी सुविधाओं से क्षेत्र को फायदा हुआ है। बेहतर सड़क संपर्क के कारण चित्रकूट से दिल्ली तक पहुंचना आसान हुआ है। उन्होंने कहा कि सपा की नीतियों से असंतुष्ट होकर उन्होंने भाजपा का साथ देने का फैसला किया।
अभय सिंह ने रामचरितमानस और भर्ती प्रक्रिया को लेकर घेरा सपा को
अयोध्या की गोसाईंगंज सीट के विधायक अभय सिंह ने भी भाजपा में शामिल होने के बाद समाजवादी पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने रामचरितमानस को जलाने और फाड़ने की घटनाओं का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि सपा ने इन घटनाओं का विरोध नहीं किया। उन्होंने पार्टी पर राष्ट्रविरोधी तत्वों का समर्थन करने का भी आरोप लगाया।
अभय सिंह ने वर्ष 2012 से 2017 के बीच हुई भर्तियों पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि टीजीटी, पीजीटी, पशुधन प्रसार अधिकारी और यूपीएससी जैसी भर्तियों में जाति और क्षेत्र के आधार पर कुछ लोगों को फायदा पहुंचाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि मेहनत से पढ़ाई करने वाले कई अभ्यर्थी नौकरी का इंतजार करते रह गए, जबकि प्रभाव और सिफारिश रखने वालों को लाभ मिला। ये आरोप अभय सिंह के बयान पर आधारित हैं।
भाजपा सरकार की नीतियों को बताया बेहतर
अभय सिंह ने दावा किया कि भाजपा सरकार में दलित, पिछड़े और सामान्य वर्ग के लोगों के लिए बिना भेदभाव विकास कार्य किए जा रहे हैं। वहीं, विनोद चतुर्वेदी ने बुंदेलखंड में सड़क और औद्योगिक विकास को भाजपा सरकार की उपलब्धि बताया।
तीनों विधायकों के बयानों से साफ है कि भाजपा में शामिल होने के बाद वे अपने फैसले को सही ठहराने के साथ सपा की नीतियों पर भी सवाल उठा रहे हैं। अब देखना होगा कि इन नेताओं के भाजपा में आने का आगामी विधानसभा चुनाव और उत्तर प्रदेश के राजनीतिक समीकरणों पर क्या असर पड़ता है।
