श्री कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद विवाद: सुप्रीम कोर्ट में 17 सितंबर को अहम सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट करेगा 17 सितंबर को सुनवाई
मथुरा की श्री कृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मस्जिद विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में 17 सितंबर को अहम सुनवाई होगी। यह सुनवाई यह तय करेगी कि इलाहाबाद हाईकोर्ट में मंदिर-मस्जिद विवाद का ट्रायल जारी रहेगा या नहीं। मुस्लिम पक्ष की ओर से दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में पहली बार सुनवाई होगी, जिसमें मुकदमों की पोषणीयता पर विचार किया जाएगा।

हाईकोर्ट के फैसले को मुस्लिम पक्ष ने दी चुनौती
शाही ईदगाह मस्जिद कमेटी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक अगस्त के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। हाईकोर्ट में जस्टिस मयंक कुमार जैन की सिंगल बेंच ने 18 मुकदमों की पोषणीयता को लेकर मुस्लिम पक्ष की याचिका खारिज कर दी थी। हाईकोर्ट ने हिंदू पक्ष की याचिकाओं को सुनवाई योग्य माना था। अब सुप्रीम कोर्ट इस फैसले पर अंतिम निर्णय लेगा।

मुस्लिम पक्ष की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में पहली सुनवाई
मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में आर्डर 7 रूल 11 के तहत मुकदमों की पोषणीयता पर सवाल उठाए हैं। सुप्रीम कोर्ट की डिवीजन बेंच, जिसमें जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस संजय कुमार शामिल हैं, इस याचिका की सुनवाई करेगी। यह सुनवाई सीरियल नंबर 26 पर सूचीबद्ध की गई है, जिसका परिणाम इलाहाबाद हाईकोर्ट में चल रहे मुकदमों पर गहरा असर डाल सकता है।

हिंदू पक्षकार करेंगे याचिका का विरोध
हिंदू पक्षकार सिद्धपीठ माता शाकुंभरी पीठाधीश्वर भृगुवंशी आशुतोष पांडेय के अनुसार, उन्होंने पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल कर दी थी। उनका कहना है कि वे मुस्लिम पक्ष की याचिका का सुप्रीम कोर्ट में भी कड़ा विरोध करेंगे। हिंदू पक्ष सुप्रीम कोर्ट में उन्हीं दलीलों को पेश करेगा जो उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट में दी थीं।

मस्जिद कमेटी ने हाईकोर्ट की सुनवाई पर रोक की मांग की
मस्जिद कमेटी ने अपनी याचिका में सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि वह केस का निपटारा होने तक इलाहाबाद हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई पर रोक लगाए। अगर सुप्रीम कोर्ट रोक लगाता है, तो इलाहाबाद हाईकोर्ट में चल रहा मुकदमों का ट्रायल रुक जाएगा। हाईकोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई 23 सितंबर को होनी है।

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के परिणाम पर नजरें
मथुरा के मंदिर-मस्जिद विवाद को लेकर 17 सितंबर को होने वाली सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस सुनवाई का न केवल मथुरा के इस ऐतिहासिक विवाद पर, बल्कि देशभर में मंदिर-मस्जिद विवादों के मामलों पर भी असर पड़ सकता है।

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