दुनिया में LNG निर्यात में अमेरिका सबसे आगे, ऑस्ट्रेलिया और कतर भी बड़े सप्लायर; जानें किसकी कितनी क्षमता

दुनिया में बढ़ती ऊर्जा मांग और प्रदूषण को कम करने के प्रयासों के बीच लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की अहमियत लगातार बढ़ रही है। कई देश अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए प्राकृतिक गैस के आयात पर निर्भर हैं। ऐसे में वैश्विक LNG बाजार में प्रमुख निर्यातक देशों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। ग्लोबल एनर्जी मॉनिटर और स्टेटिस्टा के आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और कतर दुनिया के प्रमुख LNG सप्लायर देशों में शामिल हैं।

अमेरिका बना दुनिया का सबसे बड़ा LNG निर्यातक

ग्लोबल एनर्जी मॉनिटर के आंकड़ों के अनुसार, LNG निर्यात क्षमता के मामले में अमेरिका दुनिया में पहले स्थान पर है। अमेरिका की कुल निर्यात क्षमता 102.3 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष बताई गई है। यह क्षमता अन्य प्रमुख निर्यातक देशों से अधिक है।

साल 2023 में अमेरिका ने ऑस्ट्रेलिया और कतर को पीछे छोड़कर दुनिया के सबसे बड़े LNG निर्यातक का स्थान हासिल किया था। उस वर्ष अमेरिका ने करीब 9.12 करोड़ मीट्रिक टन LNG का निर्यात किया। वैश्विक ऊर्जा बाजार में अमेरिका की बढ़ती भूमिका का असर प्राकृतिक गैस की आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ता है।

ऑस्ट्रेलिया और कतर भी बड़े LNG सप्लायर

वैश्विक LNG निर्यात क्षमता की सूची में ऑस्ट्रेलिया दूसरे और कतर तीसरे स्थान पर हैं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, ऑस्ट्रेलिया की क्षमता 81.8 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष, जबकि कतर की क्षमता 77.1 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष है।

अमेरिका की निर्यात क्षमता कतर से करीब 25.2 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष अधिक है। इन आंकड़ों से वैश्विक LNG कारोबार में अमेरिका की मजबूत स्थिति का पता चलता है। वहीं, ऑस्ट्रेलिया और कतर भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्राकृतिक गैस की आपूर्ति बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं।

दुनिया की LNG आपूर्ति पर तीन देशों का बड़ा प्रभाव

अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और कतर की संयुक्त LNG निर्यात क्षमता करीब 261.2 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष है। दिए गए आंकड़ों के अनुसार, यह दुनिया के शीर्ष 10 निर्यातक देशों की कुल क्षमता का लगभग 62 प्रतिशत है।

वैश्विक LNG बाजार में इन देशों की भूमिका केवल उत्पादन तक सीमित नहीं है। भू-राजनीतिक तनाव, समुद्री परिवहन मार्गों में बाधाएं, ऊर्जा की मांग और निर्यात से जुड़ी नीतियां भी गैस की कीमतों तथा आपूर्ति को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में प्रमुख LNG निर्यातक देशों की क्षमता और रणनीति पर दुनिया के ऊर्जा बाजार की नजर बनी रहती है।

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