Himanta Biswa: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने हाल ही में मेघालय के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (USTM) के खिलाफ विवादित बयान दिए हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय के स्थापत्य को इस्लाम के पवित्र स्थल ‘मक्का’ से मिलती-जुलती बताते हुए इसे शिक्षा को नष्ट करने वाला करार दिया। मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद से राज्य में एक नया विवाद खड़ा हो गया है।
Himanta Biswa: ‘बाढ़ जिहाद’ का आरोप: USTM के निर्माण कार्य पर सवाल
इस महीने की शुरुआत में, सरमा ने गुवाहाटी में अचानक आई बाढ़ के लिए USTM के निर्माण कार्य को जिम्मेदार ठहराया। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय द्वारा किए जा रहे निर्माण कार्यों के चलते वनों की कटाई और पहाड़ियों का अतिक्रमण हो रहा है, जिससे बाढ़ की समस्या उत्पन्न हो रही है। उन्होंने इसे ‘बाढ़ जिहाद’ का नाम देकर नया विवाद खड़ा किया है।
Himanta Biswa: मुख्य द्वार पर मक्का जैसी संरचना: विवाद की जड़
सरमा ने USTM के मुख्य द्वार पर तीन गुंबदों की संरचना को ‘मक्का और मदीना’ जैसा बताया है। उनका कहना है कि यह गुंबद ‘जिहाद’ का संकेत है और उन्होंने विश्वविद्यालय के प्रबंधन पर जिहाद फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी कहा कि वहां नामघर और चर्च जैसी संरचनाएं भी होनी चाहिए ताकि सभी धर्मों का सम्मान हो सके।
कांग्रेस का पलटवार: हिमंत बिस्वा सरमा के बयान की निंदा
सरमा के इन बयानों के बाद कांग्रेस के सांसद गौरव गोगोई ने उनकी आलोचना की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री अपने असफलताओं और घोटालों को छिपाने के लिए अतिशयोक्तिपूर्ण बयानबाजी कर रहे हैं। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर सरमा के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है।
समाज में विभाजन और विवाद: भविष्य की चुनौतियाँ
सरमा के इस बयान के बाद असम और मेघालय के सामाजिक और सांस्कृतिक संबंधों में तनाव बढ़ गया है। विश्वविद्यालय के खिलाफ लगाए गए आरोपों ने शैक्षिक संस्थानों की स्वतंत्रता और धार्मिक सहिष्णुता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले दिनों में इस विवाद का असर दोनों राज्यों के बीच संबंधों पर पड़ सकता है।
निष्कर्ष: विवाद का अंत नहीं
अभी तक इस मुद्दे पर कोई ठोस समाधान नहीं निकला है, लेकिन यह स्पष्ट है कि यह विवाद आने वाले समय में और भी गहरा सकता है। असम और मेघालय की सरकारों को इस मामले में संवेदनशीलता से निपटने की जरूरत है ताकि शिक्षा और धार्मिक सहिष्णुता को बढ़ावा दिया जा सके।
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