Samrat Choudhary: बिहार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने रविवार को वक्फ बोर्ड (संशोधन) बिल-2024 पर अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि बिल के प्रावधानों के तहत किसी की जमीन नहीं छीनी जा रही है और अभी सभी से राय ली जा रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई जमीन आम लोगों की है, तो सरकार को उसकी जानकारी होना आवश्यक है। इस प्रक्रिया के दौरान सभी पक्षों को अपनी राय देने का अवसर है, और इसके बाद ही बिल को सदन में पेश किया जाएगा।
लोकसभा में बिल का प्रस्तुतीकरण और विपक्ष की प्रतिक्रिया
लोकसभा में 8 अगस्त को केंद्रीय संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने ‘वक्फ (संशोधन) बिल-2024’ पेश किया। इस दौरान, विपक्षी सांसदों ने बिल के खिलाफ जोरदार हंगामा किया। मुस्लिम धर्मगुरुओं ने भी इस बिल की आलोचना की और इसे गलत करार दिया। विरोध के बावजूद, किरेन रिजिजू ने इस बिल के प्रावधानों को उचित ठहराते हुए कहा कि इसमें किसी भी धार्मिक संस्था की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप नहीं किया जा रहा है।
बिल के उद्देश्य और ऐतिहासिक संदर्भ
किरेन रिजिजू ने बताया कि वक्फ (संशोधन) बिल पहली बार इस सदन में पेश नहीं किया जा रहा। 1954 में वक्फ एक्ट लाया गया था और इसके बाद कई बार संशोधन हुए हैं। यह बिल 1995 के वक्फ कानून में संशोधन के लिए पेश किया जा रहा है, क्योंकि 2013 में लाए गए प्रावधानों ने वक्फ एक्ट-1995 का स्वरूप बदल दिया था। बिल का उद्देश्य मुस्लिम समुदाय के भीतर महिलाओं, बच्चों और पिछड़े वर्गों के सदस्यों के लिए प्रतिनिधित्व और अवसर सुनिश्चित करना है, जिन्हें पहले कभी ऐसा मौका नहीं मिला।
किरेन रिजिजू का समर्थन और मुस्लिम समुदाय की प्रतिक्रियाएं
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि जब से यह बिल लोकसभा में पेश किया गया है, उन्होंने कई मुस्लिम समुदाय के नेताओं से मुलाकात की है। उन्होंने बताया कि अधिकांश ने इस बिल के संशोधन का स्वागत किया है और इसे मुसलमानों के हित में बताया है। रिजिजू के अनुसार, यह बिल मुसलमानों के लिए विशेष रूप से लाया गया है और इसका उद्देश्य उनके समुदाय के भीतर बेहतर अवसर और प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना है।
बिल की प्रक्रियात्मक स्थिति और भविष्य
वक्फ (संशोधन) बिल-2024 की प्रक्रिया अभी प्रारंभिक चरण में है, और इसे लेकर विभिन्न पक्षों की राय ली जा रही है। सम्राट चौधरी के अनुसार, इस बिल के प्रावधानों को लागू करने से पहले सभी की राय को महत्व दिया जाएगा और फिर सदन में इसे पेश किया जाएगा। बिल की प्रक्रिया और उसकी समीक्षा के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि सभी की चिंताओं और सुझावों को सही तरीके से संबोधित किया गया है।
