संगीता कुमारी सिंह देव ने महासभा को किया संबोधित
भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल की नेता और सांसद संगीता कुमारी सिंह देव ने महासभा को संबोधित करते हुए परमाणु विज्ञान के शांतिपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देने में IAEA के योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने सदस्य देशों की मानवीय और संस्थागत क्षमताओं के विकास के साथ परमाणु प्रौद्योगिकी के लिए प्रभावी नियामक ढांचे तैयार करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन के अनुसार, संगीता सिंह देव ने परमाणु प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत की प्रगति का भी उल्लेख किया। उन्होंने IAEA के तकनीकी सहयोग कार्यक्रम और उसकी प्रमुख पहलों के प्रति भारत का समर्थन दोहराया।
साउथ-साउथ सहयोग के प्रति भारत की प्रतिबद्धता
भारत ने साउथ-साउथ सहयोग के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी व्यक्त की। इस सहयोग का उद्देश्य विकासशील देशों के बीच ज्ञान, तकनीक और अनुभव साझा करना है, ताकि परमाणु विज्ञान के लाभ जरूरतमंद देशों तक पहुंच सकें।
भारत ने इस बात पर भी जोर दिया कि परमाणु प्रौद्योगिकी के शांतिपूर्ण उपयोग के साथ सुरक्षा और संरक्षा के मजबूत मानकों को बनाए रखना जरूरी है। इससे सतत विकास के लक्ष्यों को हासिल करने में मदद मिल सकती है।
भारत की विकास साझेदारी को कई देशों ने सराहा
इस बीच, 22 अक्टूबर को आयोजित भारत-संयुक्त राष्ट्र विकास साझेदारी कोष के नौवें वार्षिक कार्यक्रम में कई देशों ने भारत की विकास सहायता की सराहना की। लाओस, श्रीलंका, तंजानिया, माइक्रोनेशिया, मोल्दोवा, मोरक्को और सेंट लूसिया के प्रतिनिधियों ने भारत के सहयोग के लिए आभार जताया।
कार्यक्रम में विकासशील देशों की जरूरतों के अनुरूप साझेदारी, तकनीकी सहयोग और विकास परियोजनाओं के महत्व पर चर्चा हुई।
मोल्दोवा ने भारत के सहयोग को बताया अहम
संयुक्त राष्ट्र में मोल्दोवा के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत जॉर्जे ल्यूका ने कहा कि भारत के साथ साझेदारी ने सार्वजनिक नीतियों को बेहतर बनाने के लिए जनसंख्या संबंधी आंकड़ों के उपयोग की क्षमता को मजबूत किया है।
