Reservation: सुप्रीम कोर्ट ने अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के भीतर उप-वर्गीकरण की अनुमति दी है, जिसके बाद न्यायमूर्ति पंकज मिथल ने अपने विचार साझा किए। न्यायमूर्ति मिथल ने कहा कि आरक्षण केवल पहली पीढ़ी के लिए होना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि दूसरी पीढ़ी को आरक्षण का लाभ नहीं मिलना चाहिए और राज्य को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि दूसरी पीढ़ी सामान्य श्रेणी के साथ समान स्तर पर खड़ी हो रही है या नहीं।
Reservation:संविधान पीठ का निर्णय
सात न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने 6:1 के बहुमत से एससी और एसटी के उप-वर्गीकरण को कानूनी माना। न्यायमूर्ति बेला त्रिवेदी ने इससे असहमति जताई। इस फैसले ने ईवी चिन्नैया मामले के फैसले को खारिज कर दिया, जिसमें माना गया था कि संविधान के अनुच्छेद 341(1) के तहत राष्ट्रपति के आदेश में सभी जातियाँ एक ही वर्ग की हैं और उन्हें आगे विभाजित नहीं किया जा सकता।
Reservation:सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ के विचार
भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि ऐतिहासिक साक्ष्यों से यह स्थापित हो चुका है कि राष्ट्रपति द्वारा अधिसूचित अनुसूचित जाति एक विषम वर्ग है और सजातीय नहीं है। उन्होंने कहा कि एससी और एसटी के सदस्य अक्सर व्यवस्थागत भेदभाव के कारण उन्नति नहीं कर पाते हैं। अनुच्छेद 14 जाति के उप-वर्गीकरण की अनुमति देता है, और न्यायालय को यह जांच करनी चाहिए कि क्या वर्ग समरूप है और किसी उद्देश्य के लिए एकीकृत न किए गए वर्ग को आगे वर्गीकृत किया जा सकता है।
न्यायमूर्ति गवई के विचार
न्यायमूर्ति गवई ने डॉ. अंबेडकर के भाषण का उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि जब तक हमारे पास सामाजिक लोकतंत्र नहीं है, तब तक राजनीतिक लोकतंत्र का कोई उपयोग नहीं है। उन्होंने कहा कि कुछ अनुसूचित जातियों द्वारा झेली जाने वाली कठिनाइयाँ और पिछड़ापन प्रत्येक जाति के लिए अलग-अलग हैं। उन्होंने ईवी चिन्नैया के फैसले को गलत बताया और राज्य को एससी एसटी श्रेणी के बीच क्रीमी लेयर की पहचान करने और उन्हें आरक्षण के दायरे से बाहर करने के लिए नीति विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
न्यायमूर्ति बेला त्रिवेदी की असहमति
न्यायमूर्ति बेला त्रिवेदी ने बहुमत के फैसले से असहमति जताई। उन्होंने कहा कि तीन जजों की बेंच ने बिना कोई कारण बताए एक रहस्यमय और औपचारिक आदेश पारित किया। उन्होंने यह भी कहा कि आरक्षण प्रदान करने की आड़ में राज्य राष्ट्रपति की सूची में छेड़छाड़ नहीं कर सकते और यह कानून के तहत अस्वीकार्य है।
निष्कर्ष
एससी और एसटी के भीतर उप-वर्गीकरण का मुद्दा संवेदनशील और महत्वपूर्ण है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने एक नई बहस छेड़ दी है। न्यायमूर्ति पंकज मिथल का यह सुझाव कि आरक्षण केवल पहली पीढ़ी के लिए होना चाहिए, एक नई दिशा में सोचने का अवसर प्रदान करता है। इस फैसले के बाद देश में आरक्षण प्रणाली पर व्यापक चर्चा और विचार-विमर्श की आवश्यकता है ताकि इसे और अधिक प्रभावी और न्यायसंगत बनाया जा सके।
Reservation:
यहाँ पढ़े: कृष्ण जन्मभूमि विवाद: इलाहाबाद उच्च न्यायालय का ऐतिहासिक निर्णय
