Ankita Bhakat: कहते हैं कि सपने देखने वालों को उड़ान भरनी आती है, लेकिन उन सपनों को पूरा करने के लिए निरंतर प्रयास और मेहनत की जरूरत होती है। पश्चिम बंगाल की अंकिता भकत की कहानी इस बात का जीवंत उदाहरण है। एक परिवार की आर्थिक स्थिति कठिन थी; उनके पिता दूध बेचकर किसी तरह घर का खर्च उठाते थे। लेकिन अंकिता ने अपने परिवार का मान बढ़ाने की ठानी और उसके लिए उसने जी-जान से मेहनत की। आज वह तीरंदाजी के मैदान में अपना जादू बिखेर रही हैं, जिससे पूरा देश उन पर गर्व कर रहा है। अंकिता इस समय पेरिस ओलंपिक 2024 में भारत का प्रतिनिधित्व कर रही हैं।
संघर्ष और समर्पण
अंकिता भकत की तीरंदाजी की यात्रा आसान नहीं रही। कोलकाता के सर्कस मैदान में एक स्थानीय प्रतियोगिता ने उनकी ज़िंदगी में बड़ा बदलाव किया। एक दूधवाले के घर जन्मी अंकिता के पास न तो अच्छे उपकरण थे और न ही विशेष प्रशिक्षण। आर्थिक तंगी ने उनके हौसले को तोड़ने की कोशिश की, लेकिन अंकिता ने हार नहीं मानी।
अंकिता ने स्थानीय क्लब में उधार के उपकरण लेकर प्रैक्टिस शुरू की। उन्होंने दिन-रात मेहनत की और अपनी प्रतिभा को निखारा। 2014 में उनकी मेहनत का परिणाम सामने आया जब उन्हें टाटा तीरंदाजी अकादमी में जगह मिली। जमशेदपुर में कोच धर्मेंद्र तिवारी, पूर्णिमा महतो और राम अवधेश के मार्गदर्शन में अंकिता ने अपनी क्षमताओं को और उभारा।
सफलताओं का सिलसिला
केवल 18 साल की उम्र में अंकिता ने भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए अमेरिका के यांकटन में विश्व तीरंदाजी युवा चैंपियनशिप में भाग लिया। इसके बाद से उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। 2015 में सियोल इंटरनेशनल यूथ आर्चरी फेस्ट में उन्होंने रजत और कांस्य पदक जीते।
अंकिता ने 2017 में एशिया कप और राष्ट्रीय चैम्पियनशिप के फाइनल तक का सफर तय किया और खेलो इंडिया महिला नेशनल रैंकिंग में अपना पहला स्वर्ण पदक जीता। वह मिश्रित टीम में 2017 विश्व चैंपियन, 2022 एशियाई खेलों में टीम रिकर्व कांस्य पदक विजेता हैं। उन्होंने एशियाई चैंपियनशिप में 3 टीम पदक भी जीते। साल 2021 में उन्होंने रजत और 2019 तथा 2023 में कांस्य पदक हासिल किया।
अंकिता ने 2024 के फाइनल वर्ल्ड आर्चरी ओलंपिक क्वालीफायर में टॉप 8 में जगह बनाकर पेरिस ओलंपिक में अपनी जगह पक्की की। आज वह पेरिस ओलंपिक 2024 में देश का गर्व बढ़ा रही हैं।
