Teflon flu: जानिए इसके कारण, लक्षण और बचाव के उपाय

Teflon flu: बीते साल अमेरिका में टेफ्लॉन फ्लू (Teflon flu) के कई मामले सामने आए। 16 जुलाई को प्रकाशित वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल इस बीमारी के कारण 250 से अधिक लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। टेफ्लॉन फ्लू, जिसे पॉलिमर फ्यूम फीवर (Polymer Fume Fever) भी कहा जाता है, एक दुर्लभ बीमारी है जो अत्यधिक गर्म नॉनस्टिक बर्तन से निकलने वाले धुएं के कारण होती है। इसका नाम नॉनस्टिक कोटिंग ‘टेफ्लॉन’ के नाम पर रखा गया है, जो कई कुकवेयर में उपयोग की जाती है।

टेफ्लॉन फ्लू के कारण

पॉलिमर फ्यूम फीवर (टेफ्लॉन फ्लू) उस स्थिति को दर्शाता है जो बहुत ज्यादा गर्म पॉलीटेट्राफ्लुओरोएथिलीन (PTFE) से निकलने वाले जहरीले धुएं के कारण होती है। यह बीमारी नॉनस्टिक बर्तन में पाए जाने वाले फ्लोरोकार्बन के थर्मल डिग्रेडेशन के कारण होती है। खराब वेंटिलेशन या सफाई की कमी भी इसके खतरे को बढ़ा सकती है। बर्तन को अत्यधिक गर्म करने पर टेफ्लॉन से निकलने वाले टॉक्सिक फ्यूम्स इस बीमारी के लिए जिम्मेदार होते हैं।

टेफ्लॉन फ्लू के लक्षण

टेफ्लॉन फ्लू के लक्षण सामान्यत: सर्दी-जुकाम से मेल खाते हैं और अक्सर नजरअंदाज कर दिए जाते हैं। इसके मुख्य लक्षणों में शामिल हैं:

  • बुखार
  • सिरदर्द
  • कंपकंपी
  • सूखी खांसी
  • सीने में जकड़न
  • सांस लेने में तकलीफ
  • गले और मांसपेशियों में दर्द

अधिकांश मरीज कुछ ही दिनों में पूरी तरह ठीक हो जाते हैं, लेकिन मृत्यु या स्थायी विकलांगता अत्यंत दुर्लभ है।

टेफ्लॉन के हानिकारक प्रभाव

हालांकि आजकल के टेफ्लॉन कोटेड बर्तन PFOA मुक्त होने का दावा करते हैं, इनमें अभी भी PTFE की कोटिंग होती है, जो एक कार्सिनोजन है। इन बर्तनों को गर्म करने पर इनमें से केमिकल टूटकर हवा में फैल जाते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होते हैं। इसके अलावा, PFOA और PTFE बायोडिग्रेडेबल नहीं होते, जिससे ये शरीर में जमा हो सकते हैं और स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकते हैं।

नेचर-फ्रेंडली कुकवेयर के विकल्प

भारतीय काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने नॉन-स्टिक बर्तनों के हानिकारक प्रभावों से बचने के लिए नई डाइटरी गाइडलाइन्स जारी की हैं। ICMR ने सलाह दी है कि नॉन-स्टिक बर्तनों की जगह नेचर-फ्रेंडली कुकवेयर, जैसे मिट्टी के बर्तन और कोटिंग-मुक्त ग्रेनाइट पत्थर के बर्तन का उपयोग करें, ताकि स्वास्थ्य को बेहतर तरीके से सुरक्षित रखा जा सके।

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