बंगाल की खाड़ी में एक और चक्रवात का खतरा, ओडिशा-आंध्र प्रदेश समेत 3 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

अर्नब चक्रवात का असर अभी पूरी तरह खत्म भी नहीं हुआ है कि बंगाल की खाड़ी में एक और तूफान बनने की आशंका बढ़ गई है। दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के आसपास बना कम दबाव का क्षेत्र शनिवार को डिप्रेशन में बदल गया। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, इसके गहरे दबाव और फिर चक्रवाती तूफान में तब्दील होने की संभावना है।

आईएमडी के बुलेटिन के अनुसार, शनिवार सुबह 11:30 बजे डिप्रेशन का केंद्र दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी में था। यह श्री विजयपुरम से करीब 330 किलोमीटर पश्चिम-दक्षिण-पश्चिम और निकोबार से 300 किलोमीटर पश्चिम-उत्तर-पश्चिम में स्थित था। मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक, यह 2 नवंबर की शाम तक आंध्र प्रदेश के तट के पास पहुंच सकता है।

ओडिशा, आंध्र प्रदेश और पुडुचेरी में भारी बारिश की आशंका

संभावित चक्रवाती तूफान के असर से ओडिशा, आंध्र प्रदेश और पुडुचेरी में भारी बारिश हो सकती है। इस दौरान 80 से 90 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की आशंका है। मौसम विभाग ने मछुआरों को समुद्र में न जाने और समुद्री तटों से दूर रहने की सलाह दी है।

इन राज्यों में दर्ज हुई भारी बारिश

मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, गंगीय पश्चिम बंगाल, अंडमान-निकोबार द्वीप समूह और तेलंगाना में भारी से बहुत भारी बारिश दर्ज की गई। यहां 12 से 20 सेंटीमीटर तक वर्षा हुई। वहीं, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, बिहार, छत्तीसगढ़ और तटीय आंध्र प्रदेश में 7 से 11 सेंटीमीटर तक भारी बारिश रिकॉर्ड की गई।

कई राज्यों में आंधी, बिजली और बारिश का अलर्ट

आईएमडी ने 2 और 4 नवंबर को तटीय आंध्र प्रदेश और यनम में बारिश की संभावना जताई है। रायलसीमा में 2 से 4 नवंबर और तेलंगाना में 2 से 3 नवंबर के बीच कुछ स्थानों पर आंधी-तूफान, बिजली गिरने और तेज हवाएं चल सकती हैं। हवा की रफ्तार 80 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने का अनुमान है।

इसके अलावा, 1 से 4 नवंबर के बीच केरल और माहे, उत्तरी आंतरिक कर्नाटक तथा दक्षिणी आंतरिक कर्नाटक में भारी बारिश होने की संभावना है।

अल नीनो वाले वर्षों में कम बनते हैं चक्रवात

आईएमडी के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र के मुताबिक, उत्तर हिंद महासागर में आमतौर पर हर साल 4 से 5 चक्रवाती तूफान आते हैं। हालांकि, अल नीनो वाले वर्षों में तूफानों की संख्या सामान्य से कम रहने की प्रवृत्ति देखी जाती है। ऐसे वर्षों में तूफानों की तीव्रता और गति भी धीमी हो सकती है।

वहीं, 1980 से 2025 तक के आंकड़ों पर आधारित एक अध्ययन के अनुसार, पिछले 46 वर्षों में 12 बार प्री-मॉनसून सीजन के दौरान उत्तर हिंद महासागर में कोई नामित चक्रवात नहीं बना।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *