2.75 करोड़ रुपये की FDR में कथित गड़बड़ी
लोकायुक्त के मुताबिक, यह मामला वर्ष 2024-25 के दौरान भोपाल में शराब दुकान का ठेका हासिल करने के लिए जमा कराई गई प्रतिभूति राशि से जुड़ा है। आरोप है कि ठेका लेने के लिए 2 करोड़ 75 लाख 33 हजार 335 रुपये की कथित फर्जी फिक्स्ड डिपॉजिट रसीद (FDR) और फर्जी सत्यापन रिपोर्ट का इस्तेमाल किया गया।
प्रारंभिक जांच में प्रतिभूति राशि से जुड़े दस्तावेजों में कथित अनियमितताओं की बात सामने आई है। जांच एजेंसी मामले में प्रस्तुत FDR और उसके सत्यापन से संबंधित तथ्यों की पड़ताल कर रही है।
दीपम रायचूरा पर पद के दुरुपयोग का आरोप
मामले में तत्कालीन सहायक आबकारी आयुक्त दीपम रायचूरा पर कथित तौर पर मदद पहुंचाने और पद का दुरुपयोग करने के आरोप हैं। वहीं, हरियाणा के झज्जर निवासी शराब ठेकेदार जसवंत सिंह को भी आरोपी बनाया गया है। हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही निकलेगा।
लोकायुक्त DG ने स्वतः संज्ञान लेकर कराई जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए लोकायुक्त संगठन मध्य प्रदेश के महानिदेशक योगेश देशमुख ने स्वतः संज्ञान लेते हुए गोपनीय जांच कराई। जांच के दौरान दोनों आरोपियों की भूमिका सामने आने का दावा किया गया।
