UCC लागू होने पर क्या बदल सकते हैं नियम?
यूनिफॉर्म सिविल कोड का उद्देश्य अलग-अलग धर्मों के व्यक्तिगत कानूनों की जगह विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और पारिवारिक मामलों में समान कानूनी प्रावधान लागू करना है। अगर उत्तर प्रदेश में इसे लागू किया जाता है, तो इसका असर सभी समुदायों पर पड़ सकता है। उत्तराखंड में लागू यूसीसी को इस संबंध में एक उदाहरण के तौर पर देखा जा रहा है।
एक से अधिक शादी करने पर लगेगी रोक
उत्तराखंड के यूसीसी में एक से अधिक विवाह पर रोक का प्रावधान है। इसी तरह का कानून यूपी में लागू होने पर किसी व्यक्ति के लिए पहले पति या पत्नी के जीवित रहते दूसरी शादी करना कानूनी रूप से प्रतिबंधित हो सकता है। हालांकि, धार्मिक रीति-रिवाज से विवाह करने पर रोक नहीं होगी, लेकिन विवाह की कानूनी शर्तें सभी समुदायों के लिए समान होंगी।
शादी की उम्र और रजिस्ट्रेशन के नियम
उत्तराखंड के यूसीसी के तहत पुरुषों के लिए शादी की न्यूनतम उम्र 21 साल और महिलाओं के लिए 18 साल निर्धारित है। विवाह का पंजीकरण भी अनिवार्य किया गया है और इसके लिए 60 दिनों की समयसीमा तय है। यूपी में यूसीसी लागू होने की स्थिति में इन प्रावधानों को लेकर भी चर्चा हो सकती है।
तलाक की प्रक्रिया में हो सकता है बदलाव
यूसीसी लागू होने पर अलग-अलग धर्मों में तलाक के लिए अपनाई जाने वाली व्यक्तिगत प्रक्रियाओं के बजाय समान कानूनी प्रक्रिया लागू हो सकती है। इससे तलाक और दोबारा विवाह से जुड़े नियमों में भी बदलाव संभव है। उत्तराखंड के कानून में तलाक के बाद उसी व्यक्ति से दोबारा शादी करने के लिए किसी तीसरे व्यक्ति से विवाह करने की अनिवार्यता नहीं है।
संपत्ति और उत्तराधिकार के नियम भी होंगे समान
यूसीसी का असर संपत्ति के बंटवारे और उत्तराधिकार पर भी पड़ सकता है। इसके तहत अलग-अलग धर्मों के लिए लागू विरासत के नियमों की जगह समान कानूनी प्रावधान लागू हो सकते हैं। इससे मुस्लिम महिलाओं समेत सभी समुदायों की महिलाओं के संपत्ति में अधिकार तय करने के तरीके में बदलाव आ सकता है।
लिव-इन रिलेशनशिप का भी कराना होगा पंजीकरण
उत्तराखंड के यूसीसी में लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों के लिए पंजीकरण का प्रावधान है। इसके लिए कानून में तय शर्तों का पालन करना होता है। यूपी में भी ऐसा प्रावधान लागू किया जाता है तो लिव-इन में रहने वाले जोड़ों को कानूनी औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ सकती हैं।
