नौसेना के मुताबिक, यह सफल परीक्षण राफेल मरीन लड़ाकू विमानों को भारतीय नौसेना में शामिल करने और उन्हें परिचालन के लिए तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे INS विक्रांत और राफेल मरीन के बीच संचालन संबंधी अनुकूलता को परखने की प्रक्रिया आगे बढ़ी है।
एयरक्राफ्ट कैरियर पर लैंडिंग करना क्यों है चुनौतीपूर्ण?
एयरक्राफ्ट कैरियर पर लड़ाकू विमान उतारना सामान्य हवाई अड्डे पर लैंडिंग करने से काफी अलग और चुनौतीपूर्ण होता है। जमीन पर बने हवाई अड्डों की तरह यहां लंबा रनवे उपलब्ध नहीं होता। विमान को बेहद कम दूरी में अपनी गति नियंत्रित करते हुए उड़ान डेक पर सुरक्षित उतरना पड़ता है।
इसके लिए पायलट को विशेष प्रशिक्षण, सटीक नियंत्रण और अत्याधुनिक फ्लाइट तकनीक का इस्तेमाल करना होता है। समुद्र में लगातार बदलती परिस्थितियों के बीच विमान की लैंडिंग और भी चुनौतीपूर्ण हो जाती है।
एयरक्राफ्ट कैरियर को समुद्र में तैरते हुए हवाई अड्डे की तरह इस्तेमाल किया जाता है। इस पर संचालित होने वाले लड़ाकू विमानों को विशेष रूप से तैयार किया जाता है, ताकि वे कम दूरी में उड़ान भरने और सुरक्षित लैंडिंग करने में सक्षम हों।
INS विक्रांत और राफेल मरीन से मजबूत होगी नौसेना
राफेल मरीन को विशेष रूप से विमानवाहक पोत से समुद्री अभियानों के लिए तैयार किया गया है। INS विक्रांत पर इसकी सफल लैंडिंग भारतीय नौसेना की एयरक्राफ्ट कैरियर आधारित युद्धक क्षमता को मजबूत करने की दिशा में अहम उपलब्धि है।
भारत का पहला स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर INS विक्रांत देश में ही निर्मित किया गया है। यह भारतीय नौसेना की समुद्री ताकत और स्वदेशी रक्षा निर्माण क्षमता का महत्वपूर्ण उदाहरण है।
राफेल मरीन के परीक्षणों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विमान भारतीय विमानवाहक पोत के उड़ान डेक से समुद्री परिस्थितियों में सुरक्षित और प्रभावी ढंग से संचालित हो सके। पहली सफल लैंडिंग के बाद अब परीक्षणों के अगले चरण पर ध्यान रहेगा। इनके पूरा होने के बाद विमान को नौसेना में परिचालन के लिए तैयार करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
हिंद महासागर में बढ़ेगी भारत की रणनीतिक क्षमता
INS विक्रांत पर राफेल मरीन के सफल परीक्षण को हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की समुद्री विमानन क्षमता के विस्तार के रूप में देखा जा रहा है। विमानवाहक पोत से आधुनिक लड़ाकू विमानों का संचालन नौसेना को समुद्र में निगरानी, हवाई सुरक्षा और सामरिक अभियानों के लिए अतिरिक्त क्षमता प्रदान कर सकता है।
इस घटनाक्रम पर पाकिस्तान के रक्षा और सामरिक हलकों की भी नजर रहेगी। हालांकि, राफेल मरीन की सफल लैंडिंग अभी परीक्षण प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। विमान के नियमित परिचालन और उसकी वास्तविक युद्धक क्षमता का आकलन आगे के परीक्षणों और नौसेना में शामिल किए जाने के बाद ही किया जा सकेगा।
29 अक्टूबर को INS विक्रांत के डेक पर राफेल मरीन की पहली सफल लैंडिंग ने भारतीय नौसेना के समुद्री विमानन कार्यक्रम में एक महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ दिया है।
