पीएम मोदी ने कांग्रेस पर क्या कसा तंज?
चुनावी नतीजों के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि बैलेट पेपर से चुनाव होने के बावजूद कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा। इस टिप्पणी के बाद कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भी पलटवार किया और बीजेपी के प्रदर्शन पर सवाल उठाए।
पवन खेड़ा ने कैसे दिया जवाब?
पवन खेड़ा ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि प्रधानमंत्री मोदी अपने ही लोकसभा क्षेत्र की MLC सीट हार गए। उन्होंने नागपुर का जिक्र करते हुए भी बीजेपी पर निशाना साधा और कहा, “बूझो तो नागपुर में कौन जीता?”
दरअसल, नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस उम्मीदवार अभिजीत गोविंदराव वंजारी ने जीत हासिल की। इस नतीजे को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति में भी चर्चा तेज हो गई। नागपुर को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का गृह जिला और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का प्रमुख गढ़ माना जाता है।
चार राज्यों में MLC चुनाव के क्या रहे नतीजे?
उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार और कर्नाटक में हुए विधान परिषद चुनावों में अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग दलों का प्रदर्शन देखने को मिला। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 28 सीटों में से NDA ने 16 सीटें जीतीं, जबकि कांग्रेस को एक सीट मिली।
कर्नाटक में बीजेपी और जनता दल (सेक्युलर) के गठबंधन ने चारों सीटों पर जीत दर्ज की। उत्तर प्रदेश में बीजेपी और समाजवादी पार्टी ने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई, जबकि बिहार में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और जन सुराज पार्टी को जीत मिली। महाराष्ट्र में महायुति और महाविकास अघाड़ी के बीच मुकाबला देखने को मिला।
विधानसभा चुनाव से कैसे अलग होते हैं MLC चुनाव?
विधान परिषद यानी MLC के चुनाव विधानसभा चुनावों से अलग तरीके से कराए जाते हैं। विधानसभा चुनाव में संबंधित क्षेत्र के पात्र मतदाता अपने विधायक का चुनाव करते हैं, जबकि विधान परिषद की सीटों के लिए मतदान का तरीका सीट की श्रेणी पर निर्भर करता है।
स्नातक निर्वाचन क्षेत्र: इन सीटों पर पात्र और पंजीकृत स्नातक मतदाता मतदान करते हैं।
शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र: इन सीटों पर निर्धारित पात्रता पूरी करने वाले और पंजीकृत शिक्षक वोट डालते हैं।
स्थानीय निकाय निर्वाचन क्षेत्र: इन सीटों पर संबंधित स्थानीय निकायों के निर्वाचित सदस्य मतदान करते हैं।
इसके अलावा, विधान परिषद की कुछ सीटों पर विधायकों के जरिए चुनाव होता है, जबकि कुछ सदस्यों को संविधान में निर्धारित प्रावधानों के तहत राज्यपाल नामित करते हैं।
