अधिकारियों के अनुसार, इन पांच निर्वाचन क्षेत्रों में 23 अक्टूबर को मतदान हुआ था। चुनाव में कुल 72.96 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। इन सीटों पर मौजूदा विधान परिषद सदस्यों का कार्यकाल 6 दिसंबर को समाप्त हो रहा है, जिसके चलते चुनाव कराना जरूरी था।
पांच सीटों पर 182 उम्मीदवार मैदान में
महाराष्ट्र विधान परिषद की इन पांच सीटों पर कुल 182 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। सत्तारूढ़ महायुति में भारतीय जनता पार्टी (BJP), एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना और सुनेत्रा पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) शामिल हैं। वहीं, विपक्षी महा विकास आघाड़ी में कांग्रेस, शरद पवार के नेतृत्व वाली NCP (शरदचंद्र पवार) और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) शामिल हैं।
दोनों गठबंधनों को कई निर्वाचन क्षेत्रों में बागी उम्मीदवारों और सहयोगी दलों के बीच मतभेदों का सामना करना पड़ा है। इससे चुनावी मुकाबला और दिलचस्प हो गया है।
पुणे और नागपुर में BJP के सामने चुनौती
पुणे स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में BJP ने स्मिता जाधव को मैदान में उतारा है, जहां उनका मुकाबला NCP (शरदचंद्र पवार) की उम्मीदवार हर्षदा देशमुख से है। शिवसेना (UBT) ने भी इस सीट पर अपना उम्मीदवार उतारा है।
नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में मौजूदा MLC अभिजीत वंजारी का मुकाबला BJP के सुधाकर कोहाले से है। BJP के बागी अनिल सोले ने नाम वापस लेकर कोहाले का समर्थन किया था, हालांकि उनका नाम मतपत्र पर मौजूद था।
पुणे शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में BJP के कौस्तुभ गावडे का मुकाबला कांग्रेस के मौजूदा MLC जयंत असगांवकर से है। वहीं, शिवसेना ने निर्दलीय उम्मीदवार सचिन सानप का समर्थन किया है।
छत्रपति संभाजीनगर और अमरावती में भी कड़ा मुकाबला
छत्रपति संभाजीनगर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में NCP के मौजूदा MLC सतीश चव्हाण और NCP (SP) के उम्मीदवार प्रतापसिंह पाटिल के बीच मुकाबला है। शिवसेना (UBT) ने भी इस सीट पर अपना उम्मीदवार उतारा है।
अमरावती शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में मौजूदा MLC किरण सरनाइक शिवसेना के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। उनका मुकाबला कांग्रेस की अदिति पोहरे से है। शिवसेना (UBT) ने भी इस सीट पर उम्मीदवार उतारा है।
नतीजों पर टिकी महायुति और MVA की नजरें
इन पांच सीटों के नतीजे महाराष्ट्र की राजनीति में दोनों गठबंधनों की स्थिति के लिहाज से महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। चुनाव में बागी उम्मीदवारों की मौजूदगी और सहयोगी दलों के बीच प्रतिस्पर्धा ने मुकाबले को जटिल बनाया है। मतगणना पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि किन दलों को इन चुनावों में बढ़त मिली है।
