अक्सर लोगों के मन में सवाल उठता है कि ट्रेन के पहिए कितने समय तक चलते हैं, इन्हें कब बदलना पड़ता है और एक पहिए की कीमत कितनी होती है? आइए जानते हैं इससे जुड़ी अहम बातें।
कितने किलोमीटर चलने के बाद घिस जाते हैं ट्रेन के पहिए?
ट्रेन के पहियों की उम्र केवल सालों में नहीं, बल्कि उनकी स्थिति, घिसावट और तय की गई दूरी के आधार पर आंकी जाती है। पहियों की सेवा अवधि ट्रेन के प्रकार, परिचालन परिस्थितियों, भार, गति और रेलवे के रखरखाव मानकों पर निर्भर करती है।
लगातार इस्तेमाल के कारण पहियों की सतह पर घिसावट होती है। इसलिए रेलवे समय-समय पर उनकी जांच करता है और निर्धारित सुरक्षा सीमाओं के अनुसार उन्हें दोबारा मशीनिंग के लिए भेजता है या बदल देता है। सभी ट्रेनों के पहियों के लिए एक समान समय या किलोमीटर की सीमा लागू नहीं होती।
कैसे होती है ट्रेन के पहियों की जांच और मरम्मत?
भारतीय रेलवे में पहियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नियमित निरीक्षण और रखरखाव किया जाता है। इस दौरान पहिए की मोटाई, बाहरी आकार, सतह की स्थिति और संभावित दरारों की जांच की जाती है।
यदि पहिए की सतह पर सामान्य घिसावट होती है और उसकी बाकी स्थिति निर्धारित मानकों के अनुरूप रहती है, तो उसे पूरी तरह बदलने के बजाय री-प्रोफाइलिंग की जा सकती है। इस प्रक्रिया में खराद मशीन की मदद से पहिए की सतह को दोबारा निर्धारित आकार दिया जाता है।
हालांकि, अगर पहिए में दरार, गंभीर क्षति या निर्धारित सीमा से अधिक घिसावट पाई जाती है, तो उसे सुरक्षा मानकों के अनुसार बदलना पड़ता है। इससे ट्रेन के सुरक्षित संचालन में मदद मिलती है।
कितने रुपये का आता है ट्रेन का एक पहिया?
ट्रेन के पहिए की कीमत उसके प्रकार, आकार, इस्तेमाल और निर्माण तकनीक के आधार पर अलग-अलग होती है। यात्री कोच, मालगाड़ी और लोकोमोटिव में इस्तेमाल होने वाले पहियों की कीमत एक जैसी नहीं होती।
इसी तरह, केवल एक पहिए की कीमत और पूरे व्हीलसेट की कीमत में भी अंतर होता है। व्हीलसेट में आम तौर पर एक धुरी से जुड़े दो पहिए होते हैं। इसकी कुल लागत में पहियों के अलावा धुरी और अन्य संबंधित निर्माण या असेंबली खर्च भी शामिल हो सकते हैं।
इसलिए एक पहिए की कीमत 70 से 80 हजार रुपये या पूरे व्हीलसेट की कीमत 2 से 4 लाख रुपये होने जैसे आंकड़ों को सभी प्रकार की ट्रेनों पर लागू नहीं किया जा सकता। सटीक कीमत जानने के लिए संबंधित पहिए के प्रकार और रेलवे की खरीद संबंधी जानकारी देखना जरूरी है।
ट्रेन के पहियों की सुरक्षा क्यों है इतनी जरूरी?
ट्रेन के पहियों पर यात्रियों और माल का भारी वजन होता है। इन्हें लगातार पटरी के संपर्क में रहकर घर्षण, दबाव और तापमान में बदलाव का सामना करना पड़ता है। पहियों में खराबी होने पर ट्रेन के संचालन और सुरक्षा पर असर पड़ सकता है।
इसी वजह से रेलवे में पहियों की नियमित जांच, समय पर मरम्मत और जरूरत पड़ने पर उन्हें बदलना बेहद जरूरी है। उचित रखरखाव से पहियों की उपयोगी अवधि बढ़ाने के साथ-साथ रेल यात्रा को सुरक्षित बनाए रखने में भी मदद मिलती है।
