1. लेबर के दौरान पॉटी होना सामान्य हो सकता है
डिलीवरी के समय महिला को बच्चे को बाहर निकालने के लिए जोर लगाना पड़ता है। इस दौरान शरीर की मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है, जिससे कभी-कभी स्टूल यानी मल बाहर निकल सकता है। यह प्रसव के दौरान होने वाली एक सामान्य स्थिति हो सकती है। ऐसे में महिला को शर्मिंदगी महसूस करने के बजाय अपनी डिलीवरी और स्वास्थ्य पर ध्यान देना चाहिए।
2. बच्चे के जन्म के बाद भी डिलीवरी पूरी नहीं होती
कई महिलाओं को लगता है कि बच्चे के जन्म के साथ ही प्रसव की पूरी प्रक्रिया समाप्त हो जाती है, लेकिन ऐसा नहीं है। बच्चे के जन्म के बाद प्लेसेंटा यानी गर्भनाल से जुड़ा ऊतक, जिसे आमतौर पर आफ्टरबर्थ भी कहा जाता है, गर्भाशय से बाहर निकलता है। यह प्रसव प्रक्रिया का एक अहम हिस्सा है।
3. प्लेसेंटा बाहर निकलने में भी लग सकता है समय
बच्चे के जन्म के बाद प्लेसेंटा को बाहर निकालने की प्रक्रिया पूरी की जाती है। इस दौरान डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ महिला की स्थिति पर नजर रखते हैं और जरूरत के अनुसार निर्देश देते हैं। यह प्रसव का सामान्य चरण है, हालांकि किसी भी असामान्य लक्षण या अधिक रक्तस्राव की स्थिति में तुरंत मेडिकल सहायता जरूरी होती है।
4. खांसने या जोर लगाने के लिए कहा जा सकता है
प्रसव के दौरान या बच्चे के जन्म के बाद मेडिकल स्टाफ महिला को कुछ निर्देश दे सकता है। इनमें खांसने या जोर लगाने के लिए कहना भी शामिल हो सकता है, जो स्थिति और चिकित्सकीय जरूरत पर निर्भर करता है। महिला को निर्देशों का पालन करना चाहिए और कोई परेशानी महसूस होने पर डॉक्टर को बताना चाहिए।
5. डिलीवरी के दौरान होने वाले बदलावों को लेकर शर्मिंदा न हों
प्रसव के दौरान शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं। पॉटी हो जाना भी उनमें से एक हो सकता है। यह अपने आप में जरूरी नहीं कि किसी समस्या का संकेत हो। डिलीवरी के समय डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ का मुख्य उद्देश्य मां और बच्चे की सुरक्षा सुनिश्चित करना होता है। इसलिए महिलाओं को ऐसी प्राकृतिक शारीरिक प्रतिक्रियाओं के लिए शर्मिंदा होने की जरूरत नहीं है।
डॉक्टर की सलाह क्यों जरूरी है?
हर महिला का प्रसव अनुभव अलग होता है। इसलिए डिलीवरी के दौरान होने वाले किसी भी बदलाव को लेकर चिंता होने पर डॉक्टर से बात करना बेहतर है। प्रसव से पहले डॉक्टर से प्रक्रिया के विभिन्न चरणों के बारे में जानकारी लेने से मन में मौजूद आशंकाओं को दूर करने और मानसिक रूप से तैयार रहने में मदद मिल सकती है।
