एग्रीवोल्टाइक तकनीक से खेतों में उगेगा अनाज, बनेगी बिजली
मंत्री ए.के. शर्मा ने बताया कि उत्तर प्रदेश देश का प्रमुख कृषि राज्य है। यहां करीब 3 करोड़ किसान खेती पर निर्भर हैं और 80 प्रतिशत से ज्यादा कृषि जोत एक हेक्टेयर से छोटी हैं। ऐसे में खेती की जमीन का बेहतर इस्तेमाल करना जरूरी है। एग्रीवोल्टाइक तकनीक के जरिए खेतों में ऊंचाई पर सोलर पैनल लगाए जा सकते हैं और उनके नीचे फसलों की खेती भी जारी रखी जा सकती है। इससे एक ही जमीन से अनाज और बिजली, दोनों मिल सकेंगे। साथ ही ग्रामीण इलाकों में रोजगार और किसानों की आय बढ़ाने के नए अवसर भी बन सकते हैं।
पीएम सूर्य घर और पीएम-कुसुम योजना से बढ़ रहा सौर ऊर्जा उत्पादन
ए.के. शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में सौर ऊर्जा को बढ़ावा मिल रहा है। पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना और पीएम-कुसुम जैसी योजनाओं से घरों की छतों और खेतों में सौर ऊर्जा उत्पादन को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश भी इस दिशा में तेजी से काम कर रहा है। प्रदेश ने सौर ऊर्जा क्षमता बढ़ाने के साथ किसानों को मजबूत बनाने और निवेश के नए अवसर तैयार करने पर ध्यान दिया है।
एडीबी की तकनीकी मदद से वाराणसी में शुरू होगा पायलट प्रोजेक्ट
मंत्री ने बताया कि एग्रीवोल्टाइक के लिए एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) से तकनीकी सहायता पाने वाला उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य है। वाराणसी स्थित भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (ICAR-IIVR) में 100 किलोवाट क्षमता का पायलट एग्रीवोल्टाइक प्रोजेक्ट तैयार किया जा रहा है। इसकी व्यवहार्यता संबंधी स्टडी पूरी हो चुकी है और परियोजना क्रियान्वयन के चरण में है। इस प्रोजेक्ट से यह समझने में मदद मिलेगी कि खेती और सौर ऊर्जा उत्पादन को एक साथ किस तरह बेहतर बनाया जा सकता है।
रूफटॉप सोलर और बायो-एनर्जी में यूपी की उपलब्धियां
सरकार की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, पीएम सूर्य घर योजना के तहत उत्तर प्रदेश में करीब 9 लाख घरों में 3,018 मेगावाट रूफटॉप सोलर क्षमता स्थापित की जा चुकी है। पीएम-कुसुम योजना के कंपोनेंट C1 के तहत 8,896 कृषि पंपों को सौर ऊर्जा से जोड़ा गया है। वहीं, 581 सब-स्टेशनों पर 1,708 मेगावाट क्षमता के लिए बिजली खरीद समझौते किए गए हैं। प्रदेश में 3,098 मेगावाट की यूटिलिटी-स्केल सौर परियोजनाएं चालू हैं। इसके अलावा 42 कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) प्लांट्स के साथ यूपी बायो-एनर्जी के क्षेत्र में भी अग्रणी राज्यों में शामिल है।
ग्रीन हाइड्रोजन और निवेशकों के लिए खास योजनाएं
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर और रामपुर में पायलट प्लांटों से प्रति घंटे 31.5 किलोग्राम ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन किया जा रहा है। इसके अलावा आईआईटी कानपुर, आईआईटी बीएचयू और एमएमएमयूटी के सहयोग से इस क्षेत्र में शोध और तकनीकी विकास को बढ़ावा दिया जा रहा है। राज्य की सौर ऊर्जा नीति-2022, बायो-एनर्जी नीति-2022 और ग्रीन हाइड्रोजन नीति-2024 के तहत निवेशकों को जमीन, स्टांप ड्यूटी और अन्य प्रोत्साहन देने की व्यवस्था है।
2030 तक 32 GW और 2047 तक 150 GW ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य
‘विकसित यूपी @2047’ के तहत प्रदेश ने वर्ष 2030 तक 32 गीगावाट और 2047 तक 150 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य रखा है। मंत्री ए.के. शर्मा ने वैश्विक निवेशकों, परियोजना डेवलपर्स और विशेषज्ञों से उत्तर प्रदेश के स्वच्छ ऊर्जा अभियान से जुड़ने की अपील की। सरकार की कोशिश है कि सौर ऊर्जा का विस्तार हो, किसानों की आमदनी बढ़े और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले।
