संजय निषाद की बीजेपी को चेतावनी, आरक्षण नहीं मिला तो भुगतना पड़ेगा नुकसान
महासम्मेलन को संबोधित करते हुए संजय निषाद ने कहा कि निषाद पार्टी का सफर 2013 से 2026 तक कई उपलब्धियों से भरा रहा है। अब पार्टी और समाज अपने अधिकारों को लेकर पीछे हटने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा, “अब हम सिर्फ नाव नहीं, चुनाव वाले हैं। मछुआरों को आरक्षण देना ही पड़ेगा, बीजेपी भी समझ ले।”
उन्होंने आगे चेतावनी देते हुए कहा कि अगर आरक्षण लागू नहीं किया गया तो बीजेपी को भी राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। संजय निषाद ने कहा कि जिसने भी उनके समाज के साथ धोखा किया, उसे इसका खामियाजा भुगतना पड़ा है। उनके इस बयान को मछुआरा समाज के आरक्षण के मुद्दे पर बीजेपी पर दबाव बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
गांव-गांव में निषाद पार्टी का झंडा, दूसरी पार्टियां भी समाज पर लगा रहीं दांव
संजय निषाद ने दावा किया कि आज गांव-गांव में निषाद पार्टी का झंडा दिखाई दे रहा है और तमाम राजनीतिक दल निषाद समाज को अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस भी निषाद समाज को टिकट देने की बात करती हैं, लेकिन उनकी पार्टी की पहली प्राथमिकता आरक्षण है।
उन्होंने कहा कि बीजेपी हो या समाजवादी पार्टी, सभी निषाद पार्टी को साथ लेकर चलना चाहते हैं। हालांकि, संजय निषाद ने स्पष्ट कर दिया कि गठबंधन या समर्थन पर कोई भी फैसला आरक्षण के मुद्दे पर बातचीत के बाद ही होगा। उन्होंने कहा कि आरक्षण के बिना किसी भी राजनीतिक दल से बात नहीं होगी और जरूरत पड़ने पर पार्टी अपने दम पर आगे बढ़ेगी।
‘जय निषादराज वाले भी अपना हक लेकर रहेंगे’, दिल्ली कूच का भी किया जिक्र
अपने भाषण में संजय निषाद ने सामाजिक अधिकारों की तुलना करते हुए कहा, “जय भीम वालों ने आरक्षण लागू करवा लिया, अब जय निषादराज वाले भी अपना हक लेकर रहेंगे। दिल्ली दूर नहीं है।”
उन्होंने कहा कि फिलहाल महासम्मेलन में पार्टी के कार्यकर्ता और पदाधिकारी पहुंचे हैं। अगर पूरा समाज अपने अधिकारों की मांग को लेकर दिल्ली की ओर कूच कर गया, तो स्थिति कितनी बड़ी हो सकती है, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। उनके इस बयान से साफ है कि पार्टी आरक्षण की मांग को लेकर आगे भी आंदोलन का रास्ता अपना सकती है।
‘हमें राशन नहीं, शासन चाहिए’, सत्ता में हिस्सेदारी की मांग
संजय निषाद ने कहा कि निषाद समाज को केवल सरकारी योजनाओं और राशन तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए। समाज को सत्ता और शासन में भी उचित भागीदारी मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा, “हमें राशन नहीं, शासन चाहिए।”
उन्होंने यह भी कहा कि उनका समाज राष्ट्रवादी है और अब वह अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए एकजुट हो रहा है। संजय निषाद ने हाथी चुनाव चिह्न वाली पार्टी यानी बसपा का जिक्र करते हुए कहा कि दूसरे समाजों ने अपने अधिकार हासिल किए हैं, अब निषाद समाज भी अपना हक लेकर रहेगा।
आरक्षण पर संजय निषाद का नारा, बोले- मिले तो शांति, नहीं तो क्रांति
महासम्मेलन में संजय निषाद ने आरक्षण की मांग को लेकर नारा दिया, “आरक्षण मिले तो शांति, नहीं तो होगी क्रांति।” उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से समाज के अधिकारों के लिए एकजुट रहने और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने की अपील की।
उन्होंने समाज की बेटियों की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया और कहा कि समाज को अपने अधिकारों के लिए मजबूती से खड़ा होना होगा। महासम्मेलन में निषाद समाज के संवैधानिक अधिकारों, आरक्षण और राजनीतिक भागीदारी की मांग को प्रमुखता से उठाया गया। अब देखना होगा कि आरक्षण के मुद्दे पर बीजेपी और दूसरे राजनीतिक दल क्या रुख अपनाते हैं और संजय निषाद की मांग का आगे की राजनीति पर क्या असर पड़ता है।
