नई दिल्ली: 2026 एशियन पैरा गेम्स में भारतीय पैरा एथलीट प्रणव सूरमा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया। उन्होंने चक्का फेंक (डिस्कस थ्रो) की F51/52/53 स्पर्धा में नए एशियाई रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीता। इसी स्पर्धा में भारत के राम रतन सिंह ने भी बेहतरीन प्रदर्शन किया और सिल्वर मेडल जीतकर देश की झोली में एक और पदक डाल दिया। इस तरह प्रतियोगिता में भारत ने दोहरी सफलता हासिल की।
प्रणव सूरमा ने चौथे प्रयास में बनाया एशियाई रिकॉर्ड
32 वर्षीय प्रणव सूरमा ने अपने चौथे प्रयास में 11.66 मीटर का थ्रो फेंका। इस प्रदर्शन के साथ उन्होंने नया एशियाई रिकॉर्ड बनाया और प्रतियोगिता में पहला स्थान हासिल किया।
प्रणव इससे पहले चीन में आयोजित पिछले एशियाई पैरा गेम्स में क्लब थ्रो की F51 स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीत चुके हैं। एक बार फिर पदक जीतकर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
राम रतन सिंह ने 10.35 मीटर थ्रो के साथ जीता सिल्वर
भारत के 31 वर्षीय खिलाड़ी राम रतन सिंह ने भी स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने अपने दूसरे प्रयास में 10.35 मीटर का थ्रो फेंककर सिल्वर मेडल पर कब्जा जमाया।
वहीं, ईरान के अलीरजा हेमामी को कांस्य पदक मिला। उन्होंने 20.20 मीटर का थ्रो दर्ज किया, लेकिन इस संयुक्त स्पर्धा में रजा अंक प्रणाली के आधार पर खिलाड़ियों की रैंकिंग तय की जाती है। इसी वजह से अधिक दूरी दर्ज करने के बावजूद हेमामी तीसरे स्थान पर रहे।
क्या है रजा अंक प्रणाली?
पैरा एथलेटिक्स में कई बार अलग-अलग दिव्यांगता वर्गों के खिलाड़ियों को एक ही स्पर्धा में शामिल किया जाता है। ऐसे में केवल थ्रो की दूरी या प्रदर्शन के सामान्य आंकड़ों के आधार पर पदक विजेताओं का निर्धारण नहीं होता।
रजा अंक प्रणाली के तहत खिलाड़ियों के प्रदर्शन को उनके संबंधित वर्गीकरण के अनुसार अंकों में बदला जाता है। इसके बाद प्राप्त अंकों के आधार पर उनकी रैंकिंग तय की जाती है। इस व्यवस्था का उद्देश्य अलग-अलग वर्गों के खिलाड़ियों के प्रदर्शन की तुलनात्मक गणना करना है।
क्या है F51 वर्ग?
F51 पैरा एथलेटिक्स की उन श्रेणियों में से एक है, जिसमें खिलाड़ियों की शारीरिक गतिविधियों और मांसपेशियों की क्षमता से जुड़ी गंभीर सीमाएं हो सकती हैं। इस वर्ग के खिलाड़ी आमतौर पर बैठकर थ्रो स्पर्धाओं में हिस्सा लेते हैं।
पैरा एथलेटिक्स में F51 से F57 तक की श्रेणियां मुख्य रूप से बैठकर थ्रो करने वाले खिलाड़ियों से संबंधित हैं। इन वर्गों में खिलाड़ियों की शारीरिक स्थिति, मांसपेशियों की शक्ति और अंगों की गतिशीलता जैसे कारकों को ध्यान में रखा जाता है।
भारत के लिए गौरवपूर्ण प्रदर्शन
प्रणव सूरमा के गोल्ड और राम रतन सिंह के सिल्वर मेडल ने इस स्पर्धा में भारत को दोहरी सफलता दिलाई। प्रणव ने एशियाई रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीता, जबकि राम रतन सिंह ने रजत पदक अपने नाम किया।
