सपा ने 13 अक्टूबर 2026 को यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा को ज्ञापन सौंपा। पार्टी का दावा है कि उसने प्रदेश की 100 विधानसभा सीटों की वोटर लिस्ट की जांच की। इस दौरान कई जगह एक ही व्यक्ति का नाम दो, तीन और कुछ मामलों में 10 बार तक दर्ज मिला। पार्टी ने अपने सात पन्नों के ज्ञापन में बूथ के हिसाब से उदाहरण और दस्तावेज भी दिए हैं। सपा ने आयोग से इन एंट्री की जांच कर डुप्लीकेट नाम हटाने की मांग की है।
एक व्यक्ति के नाम पर चार वोटर आईडी, मोहम्मद जुबैर ने उठाए सवाल
17 अक्टूबर 2026 को फैक्ट चेकर मोहम्मद जुबैर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक व्यक्ति के नाम से कई वोटर आईडी कार्ड बनने का मामला उठाया। जुबैर के मुताबिक, SIR की 6 जनवरी 2026 को जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में कुछ लोगों के नाम नहीं थे। नाम जुड़वाने के लिए उन्होंने Form 6 जमा किए, लेकिन कुछ मामलों में एक व्यक्ति के दो आवेदन देने पर चार वोटर आईडी कार्ड जारी हो गए।
जुबैर ने सुंदर नाम के एक व्यक्ति का उदाहरण दिया। उन्होंने यूपी CEO की वेबसाइट पर उपलब्ध Form 9 रिकॉर्ड का हवाला देते हुए कहा कि सुंदर ने 6 जनवरी और फिर 14 जनवरी को Form 6 जमा किया था। उन्होंने सवाल किया कि अगर एक व्यक्ति के नाम से बार-बार आवेदन हो रहे हैं, तो सिस्टम आवेदन के समय ही उन्हें क्यों नहीं पकड़ता। साथ ही, उन्होंने आयोग से बाकी Form 9 रिकॉर्ड भी सार्वजनिक करने की मांग की।
चुनाव आयोग ने मानी डुप्लीकेट EPIC बनने की पुरानी समस्या
जुबैर की पोस्ट के जवाब में यूपी CEO के आधिकारिक एक्स हैंडल ने कहा कि संबंधित मतदाता ने दो नहीं, बल्कि चार आवेदन जमा किए थे। आयोग ने जुबैर से उन दो आवेदनों के रेफरेंस नंबर साझा करने को कहा, जिनके आधार पर उन्होंने दावा किया था।
हालांकि, आयोग ने यह भी माना कि एक ही व्यक्ति के कई आवेदन जमा होने पर एक से ज्यादा EPIC नंबर बनने की समस्या लंबे समय से मौजूद है। EPIC यानी वोटर आईडी कार्ड का पहचान नंबर। आयोग के मुताबिक, ECINET के जरिए समय-समय पर डुप्लीकेशन की जांच की जाती है। अब ऐसी व्यवस्था बनाने पर काम हो रहा है, जिससे आवेदन जमा करते समय ही एक व्यक्ति के कई फॉर्म पकड़ में आ सकें।
SIR में 2 करोड़ से ज्यादा नाम घटे, फिर भी डुप्लीकेट एंट्री कैसे बचीं?
उत्तर प्रदेश में SIR की शुरुआत 27 अक्टूबर 2025 को हुई थी। 6 जनवरी 2026 को जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में करीब 12.55 करोड़ मतदाता थे, जबकि प्रक्रिया शुरू होने से पहले यह संख्या लगभग 15.44 करोड़ थी। यानी ड्राफ्ट लिस्ट में करीब 2.88 करोड़ नाम कम हो गए थे।
दावे और आपत्तियों के बाद 10 अप्रैल 2026 को फाइनल वोटर लिस्ट जारी हुई। इसमें 13,39,84,792 मतदाता दर्ज किए गए। शुरुआती वोटर लिस्ट के मुकाबले करीब 2.04 करोड़ नाम कम हुए, जबकि ड्राफ्ट लिस्ट से फाइनल लिस्ट तक लगभग 84.28 लाख नाम फिर जोड़े गए।
ऐसे में सवाल यही है कि इतनी बड़ी प्रक्रिया और वोटर लिस्ट की जांच के बाद भी डुप्लीकेट नाम और एक से ज्यादा EPIC नंबर कैसे रह गए? आयोग के सामने अब चुनौती सिर्फ वोटर लिस्ट से गलत नाम हटाने की नहीं, बल्कि आवेदन के स्तर पर ही डुप्लीकेट पहचान रोकने की भी है।
