दिवाली मेले में रात 10 बजे तक कर सकेंगे खरीदारी
दिल्ली पर्यटन एवं परिवहन विकास निगम (DTTDC) और दस्तकार की ओर से आयोजित इस मेले का उद्देश्य देश की पारंपरिक कला, हस्तशिल्प और कारीगरों के काम को बढ़ावा देना है।
मेले के दौरान शुक्रवार, शनिवार और रविवार को बाजार रात 10 बजे तक खुला रहेगा। वहीं, अन्य दिनों में सुबह 11 बजे से रात 8 बजे तक खरीदारी की जा सकेगी। यहां आगंतुकों को हस्तनिर्मित उत्पादों के साथ लाइव प्रस्तुतियां, क्षेत्रीय व्यंजन और कला से जुड़ी कार्यशालाओं का आनंद लेने का अवसर मिलेगा।
दिल्ली में नाइट टूरिज्म को बढ़ावा देने की पहल
दिल्ली में रात के समय पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए DTTDC की ओर से विभिन्न पहल की जा रही हैं। इसी क्रम में नेचर बाजार में भी शाम के बाद सांस्कृतिक गतिविधियों और खरीदारी को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
इस बार दस्तकार ने पहली बार अपने त्योहार से जुड़े कार्यक्रमों को शुक्रवार, शनिवार और रविवार की शाम तक विस्तार दिया है। इससे लोगों को व्यस्त दिनचर्या के बाद भी मेले में घूमने, खरीदारी करने और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद लेने का मौका मिलेगा।
इस पहल से पारंपरिक कारीगरों को अपने उत्पाद सीधे ग्राहकों तक पहुंचाने और दिल्ली में कला एवं संस्कृति को बढ़ावा देने में मदद मिलने की उम्मीद है।
कपड़ों में चिकनकारी से लेकर चंदेरी और पैठणी तक
मेले में देश के अलग-अलग राज्यों के कारीगर अपने पारंपरिक उत्पाद लेकर पहुंचे हैं। कपड़ों में चिकनकारी, कश्मीरी कढ़ाई, कांथा, चंबा कढ़ाई, गोटा पट्टी और पैचवर्क के डिजाइन देखने को मिलेंगे।
इसके अलावा कलमकारी, अज्रख, सांगानेरी और बाग प्रिंट के कपड़े भी उपलब्ध हैं। बांधनी, शिबोरी और इकत के साथ चंदेरी, महेश्वरी और पैठणी की पारंपरिक बुनाई वाले उत्पाद भी खरीदारी के लिए मिलेंगे।
पारंपरिक गहने और घर सजाने के सामान की भरमार
गहनों के शौकीनों के लिए मेले में चांदी के आभूषण, डोकरा कला, मोतियों और धागों से बने गहने, मीनाकारी के आभूषण और लाख व कांच की पारंपरिक चूड़ियां आकर्षण का केंद्र हैं।
घर की सजावट के लिए टेराकोटा, सिरेमिक, ब्लू पॉटरी, पेपर माशे, बिदरी धातु कला, पत्थर से बने उत्पाद और लकड़ी की नक्काशी वाले सामान भी उपलब्ध हैं। दिवाली पर घर सजाने या किसी को उपहार देने के लिए यहां कई तरह के हस्तनिर्मित विकल्प मिल सकते हैं।
मधुबनी, गोंड और पट्टचित्र जैसी लोक कलाओं का आकर्षण
कला प्रेमियों के लिए मेले में मधुबनी, गोंड, पट्टचित्र, पिछवाई, लिप्पन और कालीघाट जैसी पारंपरिक चित्रकलाओं के नमूने भी प्रदर्शित किए गए हैं।
इसके अलावा प्राकृतिक और जैविक उत्पादों के साथ खाने-पीने की चीजों के स्टॉल भी लगाए गए हैं। इस तरह ‘फेस्टिवल ऑफ लाइट्स 2026’ में खरीदारी के साथ भारतीय कला, संस्कृति और खानपान की विविधता का अनुभव किया जा सकता है।
