Parliament News: परिसीमन पर चर्चा के लिए पीएम मोदी से सर्वदलीय बैठक चाहते हैं खरगे, चौथी बार लिखी चिट्ठी

Parliament News: कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने परिसीमन के प्रस्तावों पर चर्चा के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से एक बार फिर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है। खरगे ने शुक्रवार, 16 अक्टूबर को प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखकर कहा कि परिसीमन जैसे बड़े और संवेदनशील मुद्दे पर संसद में कोई भी नया संवैधानिक संशोधन विधेयक लाने से पहले सभी राजनीतिक दलों से बात होनी चाहिए। इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री को लिखी गई यह उनकी चौथी चिट्ठी है।

परिसीमन विधेयक से पहले सभी दलों से बातचीत की मांग

खरगे ने अपने पत्र में कहा कि परिसीमन से जुड़े नए प्रस्तावों को अंतिम रूप देने और संसद में पेश करने से पहले राजनीतिक दलों के साथ विस्तार से चर्चा की जाए। उनका कहना है कि सभी दलों को अपनी राय रखने, आपस में विचार-विमर्श करने और दूसरे संबंधित पक्षों से बातचीत करने के लिए पर्याप्त समय मिलना चाहिए।

उन्होंने प्रधानमंत्री से यह भी कहा कि किसी बड़े संवैधानिक संशोधन विधेयक को जल्दबाजी में संसद से पारित कराने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। खरगे के मुताबिक, पहले भी सरकार ने ऐसा विधेयक लाने की कोशिश की थी, लेकिन उसे संसद में जरूरी समर्थन नहीं मिल पाया था।

मॉनसून सत्र के सत्रावसान में देरी पर भी उठाए सवाल

खरगे ने संसद के मॉनसून सत्र को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने पत्र में कहा कि 13 अगस्त, 2026 को मॉनसून सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के 64 दिन बाद भी लोकसभा और राज्यसभा का सत्रावसान नहीं हुआ है। उन्होंने इस स्थिति को अभूतपूर्व बताया।

संसद का सत्रावसान करने का अधिकार केंद्र सरकार के पास होता है। विपक्षी दलों का कहना है कि सत्रावसान में देरी के पीछे सरकार की कोई राजनीतिक रणनीति हो सकती है। उन्हें आशंका है कि सरकार परिसीमन विधेयक को फिर से संसद में लाने के लिए विशेष सत्र बुला सकती है। हालांकि, अब तक ऐसा कोई सत्र बुलाए जाने की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

अप्रैल में भी पीएम मोदी को लिखी थी चिट्ठी

खरगे ने अपने ताजा पत्र में याद दिलाया कि उन्होंने पहली बार 11 अप्रैल को प्रधानमंत्री से परिसीमन पर संवैधानिक संशोधन विधेयक लाने से पहले सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की थी। इसके बाद उन्होंने 16 जुलाई और 27 अगस्त को भी प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर यही आग्रह किया था। खरगे के मुताबिक, उनकी मांग के बावजूद सरकार ने सर्वदलीय बैठक नहीं बुलाई।

उन्होंने बताया कि 14 अप्रैल, 2026 की देर शाम परिसीमन से जुड़े विधेयक सार्वजनिक किए गए और इसके दो दिन बाद, 16 अप्रैल को संसद का विशेष सत्र बुलाया गया। 17 अप्रैल को संबंधित विधेयक संसद में जरूरी दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सका और गिर गया। यह मोदी सरकार का पहला संवैधानिक संशोधन विधेयक था, जिसे संसद में हार का सामना करना पड़ा।

परिसीमन विधेयक दोबारा लाने की अटकलों के बीच बढ़ी हलचल

विधेयक के संसद में गिरने के बाद से ही चर्चा है कि सरकार पर्याप्त समर्थन जुटाकर इसे फिर से पेश कर सकती है। हालांकि, खबर लिखे जाने तक विधेयक दोबारा संसद में नहीं लाया गया था।

खरगे ने अपनी चौथी चिट्ठी में फिर साफ किया है कि परिसीमन पर कोई भी नया प्रस्ताव संसद में लाने से पहले सभी राजनीतिक दलों को बातचीत का मौका मिलना चाहिए। उनका जोर है कि इतने अहम संवैधानिक और राजनीतिक मुद्दे पर फैसला लेने की प्रक्रिया में जल्दबाजी न हो और सभी पक्षों को अपनी बात रखने के लिए पर्याप्त समय दिया जाए।

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