पुलिस का आरोप है कि बार-बार चेतावनी देने के बावजूद दोनों शांति भंग करने और कानून तोड़ने की कोशिश कर रहे थे। वहीं, इन गिरफ्तारियों को लेकर विपक्षी नेताओं ने सवाल उठाए हैं।
तिहाड़ जेल में अलग-अलग सेल में बंद CJP नेता, कैदी नंबर भी जारी
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, जेल में आशुतोष रांका को कैदी नंबर 1784 और सौरव दास को 3752 दिया गया है। शुरुआत में दोनों को जेल नंबर 2 में रखा गया था, लेकिन बाद में रांका को जेल नंबर 4 में शिफ्ट कर दिया गया। दास अभी जेल नंबर 2 में हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों को जिन ब्लॉकों में रखा गया है, वहां दूसरे ब्लॉकों के मुकाबले कैदियों की संख्या कम है। जेल प्रशासन ने दोनों को अलग रखने के साथ उनकी निगरानी भी बढ़ा दी है।
आत्महत्या की आशंका के चलते CCTV से निगरानी, दूसरे कैदियों से मिलने पर रोक
तिहाड़ जेल के सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया है कि दोनों नेताओं की सेल में CCTV कैमरे लगाए गए हैं। जेल प्रशासन 24 घंटे उनकी निगरानी कर रहा है, ताकि वे खुद को नुकसान पहुंचाने की कोशिश न करें।
इसके अलावा, दूसरे वॉर्ड के कैदियों को उनके पास जाने की इजाजत नहीं है। गुरुवार को CJP के संयोजक अभिजीत दीपके और लीगल हेड रत्ना सिंह उनसे मिलने जेल पहुंचे थे।
सौरव दास को उसी जेल नंबर 2 में रखा गया है, जहां उमर खालिद बंद हैं और पहले अरविंद केजरीवाल भी रह चुके हैं। वहीं, आशुतोष रांका जेल नंबर 4 में हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इस जेल का इस्तेमाल पहले विपश्यना ध्यान के लिए किया जाता था। यहां हथियार कारोबारी अभिषेक वर्मा को भी रखा गया था।
दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान करीब 150 लोगों को हिरासत में लिया गया
जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा समेत करीब 150 प्रदर्शनकारियों को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया था। नेहा बोरा को बाद में रिहा कर दिया गया।
पुलिस ने दीपके को हिरासत में लेने के बाद जाफरपुर कलां थाने पहुंचाया। बताया गया कि CJP नेता कनॉट प्लेस जा रहे थे, जबकि नेहा बोरा मंडी हाउस की ओर जा रही थीं। पुलिस ने दोनों को प्रदर्शन में शामिल होने के लिए जाते समय एहतियातन हिरासत में लिया।
कनॉट प्लेस और मंडी हाउस में प्रदर्शन, चुनाव आयोग से इस्तीफे की मांग
प्रदर्शनकारियों ने कनॉट प्लेस के इनर सर्कल में मार्च किया और बीच-बीच में ‘जय हिंद’ के नारे लगाए। कुछ प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रगान भी गाया। वहीं, छात्रों और AISA व SFI के सदस्यों ने मंडी हाउस में प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें, मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को वापस लिया जाए और निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े कानून को रद्द किया जाए।
वामपंथी नेताओं जॉन ब्रिटास और संतोष कुमार ने डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया के साथ मार्च में हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों को हटाने के दौरान पुलिस और लोगों के बीच मामूली झड़पें भी हुईं। मौके पर मौजूद कुछ स्वतंत्र यूट्यूब पत्रकारों के साथ धक्का-मुक्की और हूटिंग की खबरें भी सामने आईं।
गिरफ्तारियों पर विपक्ष का विरोध
प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी पर विपक्ष ने तीखी आलोचना की है। वहीं, भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने प्रदर्शन को युवाओं का इस्तेमाल कर अराजकता फैलाने और सत्ता परिवर्तन की कोशिश बताया। प्रदर्शन और गिरफ्तारियों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है।
