हिमाचल प्रदेश के शिमला में स्थित संजौली मस्जिद को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है। कोर्ट ने मस्जिद की तीन मंजिलों को अवैध घोषित कर दिया है और आदेश दिया है कि इन मंजिलों को दो महीने के भीतर ढहा दिया जाए। इस फैसले के बाद शिमला और आसपास के इलाकों में चर्चा तेज हो गई है, क्योंकि यह मस्जिद लंबे समय से धार्मिक गतिविधियों का केंद्र रही है।
कोर्ट का आदेश
कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि संजौली मस्जिद की दूसरी, तीसरी, और चौथी मंजिलें अवैध रूप से बनाई गई हैं और इन्हें हटाया जाना चाहिए। अदालत ने आदेश दिया कि यह कार्य वक्फ बोर्ड की देखरेख में किया जाएगा, ताकि कोई अप्रिय घटना न हो और कार्यवाही नियमानुसार पूरी हो। आयुक्त ने अदालत के इस फैसले पर अपनी सहमति जताते हुए कहा कि मस्जिद के इन फ्लोर को हटाने की अनुमति दी जाती है।
विवाद की पृष्ठभूमि
संजौली मस्जिद के निर्माण को लेकर पहले से ही विवाद चल रहा था। मस्जिद के निर्माण के दौरान नियमों का उल्लंघन किया गया था, जिसकी शिकायत कई स्थानीय निवासियों ने की थी। इसके बाद मामला अदालत तक पहुंचा और अब अदालत ने इस पर अंतिम फैसला सुनाते हुए इन तीन मंजिलों को अवैध घोषित कर दिया है।
वक्फ बोर्ड की जिम्मेदारी
कोर्ट ने आदेश दिया है कि मस्जिद की अवैध मंजिलों को हटाने का कार्य वक्फ बोर्ड की निगरानी में किया जाए। वक्फ बोर्ड के पास अब दो महीने का समय है, जिसमें उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि कोर्ट के आदेश का पालन हो और अवैध निर्माण को समय पर हटाया जाए।
स्थानीय प्रतिक्रिया
इस फैसले के बाद स्थानीय समुदाय में मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग कोर्ट के फैसले का समर्थन कर रहे हैं, जबकि कुछ इसका विरोध कर रहे हैं। मस्जिद के समर्थक इस फैसले को लेकर नाखुश हैं और उन्होंने इसे धार्मिक आस्था पर चोट बताया है। वहीं, स्थानीय प्रशासन ने यह स्पष्ट किया है कि कोर्ट के आदेश का पालन करना उनकी जिम्मेदारी है और किसी भी प्रकार के अवैध निर्माण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
कोर्ट का आदेश स्पष्ट
संजौली मस्जिद का यह मामला शिमला में एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है। कोर्ट का आदेश स्पष्ट है कि मस्जिद की अवैध मंजिलों को हटाया जाना चाहिए। वक्फ बोर्ड की निगरानी में यह कार्य पूरा होगा और उम्मीद की जा रही है कि अगले दो महीनों में इस आदेश का पालन किया जाएगा।
