सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने हाई कोर्ट द्वारा सुप्रीम कोर्ट की आलोचना की निंदा की

CJI: चंद्रचूड़ ने हाई कोर्ट की सुप्रीम कोर्ट आलोचना की निंदा की

CJI: भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने हाल ही में पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय द्वारा सुप्रीम कोर्ट की आलोचना की निंदा की। इस संदर्भ में, सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश द्वारा जारी की गई टिप्पणियों को निंदनीय और अनावश्यक करार दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर स्वतः संज्ञान लेते हुए कहा कि वे उच्च न्यायालयों द्वारा पारित आदेशों से दुखी नहीं हैं, लेकिन अनुशासन बनाए रखना आवश्यक है। सीजेआई चंद्रचूड़ ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट की आलोचना से उन्हें व्यक्तिगत रूप से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन न्यायपालिका के भीतर अनुशासन बनाए रखना महत्वपूर्ण है।

मामला क्या है?

17 जुलाई को पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के एक आदेश के बाद, “इन री: ऑर्डर ऑफ पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट डेटेड 17.07.2024 एंड एन्सिलरी इश्यूज” शीर्षक से मामला दर्ज किया गया। इस आदेश में, न्यायमूर्ति राजबीर सेहरावत की अगुवाई वाली एकल पीठ ने सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जारी किए गए स्थगन आदेश की आलोचना की। न्यायमूर्ति सेहरावत ने टिप्पणी की कि सर्वोच्च न्यायालय ने अवमानना कार्यवाही पर रोक लगाते समय किसी जिम्मेदारी से बचने की प्रवृत्ति दिखाई है, और उच्च न्यायालय को संवैधानिक दृष्टिकोण से कम महत्व देने का आरोप लगाया।

सीजेआई चंद्रचूड़ ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि न तो सर्वोच्च न्यायालय और न ही उच्च न्यायालय सर्वोच्च हैं, बल्कि संविधान ही सर्वोच्च है। सुप्रीम कोर्ट की पांच न्यायाधीशों की पीठ, जिसमें सीजेआई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति संजीव खन्ना, बीआर गवई, सूर्यकांत और ऋषिकेश रॉय शामिल हैं, ने इस मामले की सुनवाई की।

निष्कर्ष

सुप्रीम कोर्ट और उच्च न्यायालय के बीच मौजूदा विवाद न्यायपालिका के भीतर अनुशासन और संविधान की सर्वोच्चता की पुष्टि करता है। यह मामला इस बात की याद दिलाता है कि न्यायपालिका के विभिन्न अंगों के बीच सहयोग और सम्मान बनाए रखना कितना महत्वपूर्ण है।

CJI:

सुप्रीम कोर्ट ने ईडी को साक्ष्यों की गुणवत्ता पर ध्यान देने की दी सलाह: मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में दोषसिद्धि दर पर चिंता

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *