ED: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से कहा कि उसे अपने अभियोजन और साक्ष्यों की “गुणवत्ता” पर विशेष ध्यान देना चाहिए। कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में ईडी की दोषसिद्धि दर की चिंता जताई और कहा कि 10 वर्षों में दर्ज किए गए 5,000 मामलों में से सिर्फ 40 मामलों में ही दोषसिद्धि हो पाई है।
सुप्रीम कोर्ट की न्यायमूर्ति सूर्यकांत, दीपांकर दत्ता और उज्ज्वल भुयान की पीठ ने ईडी से कहा, “आपको अभियोजन और साक्ष्य की गुणवत्ता पर ध्यान देना होगा। उन मामलों में जहां आप संतुष्ट हैं कि प्रथम दृष्टया मामला बनता है, उन्हें अदालत में साबित करना होगा।”
यह टिप्पणी छत्तीसगढ़ के व्यवसायी सुनील कुमार अग्रवाल की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान की गई, जिन्हें कोयला परिवहन पर अवैध लेवी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया गया था। न्यायमूर्ति दत्ता ने कहा कि पीएमएलए की धारा 19 के तहत गिरफ्तार करने वाले अधिकारी को आरोपी को “विश्वास करने के कारण” बताना चाहिए और एएसजी राजू से पूछा कि क्या उन्हें लगता है कि वर्तमान मामले में गिरफ्तारी का आदेश कायम रखने योग्य है।
मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच आयकर विभाग की एक शिकायत से शुरू हुई, जो जून 2022 में की गई छापेमारी के बाद दर्ज की गई थी। यह मामला छत्तीसगढ़ में परिवहन किए जाने वाले कोयले के लिए 25 रुपये की अवैध उगाही से संबंधित है। जांच एजेंसी ने आरोप लगाया कि आईएएस अधिकारी रानू साहू ने कोयला ट्रांसपोर्टरों और जिला खनिज निधि (डीएमएफ) ठेकों से अवैध उगाही की राशि एकत्र करने में मदद की और भारी रिश्वत ली।
छत्तीसगढ़ के व्यवसायी अग्रवाल को पिछले साल गिरफ्तार किया गया था। 8 अप्रैल को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने उनकी अंतरिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया। 19 मई को, सुप्रीम कोर्ट ने अग्रवाल को जमानत बांड प्रस्तुत करने की शर्त पर अंतरिम जमानत पर रिहा करने का निर्देश दिया। बुधवार को, सुप्रीम कोर्ट ने अग्रवाल को अंतरिम जमानत देते हुए अपने पहले के आदेश को निरपेक्ष बना दिया।
सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में ईडी की कार्यप्रणाली पर महत्वपूर्ण सवाल खड़े करती है और जांच एजेंसी को अभियोजन की गुणवत्ता में सुधार के लिए प्रेरित करती है।
ED:
मध्य प्रदेश कांग्रेस नेता सज्जन वर्मा की विवादास्पद टिप्पणी पर भाजपा की प्रतिक्रिया
