पार्षदों की LG द्वारा नियुक्ति सही या गलत? , जानें सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा..

MCD Aldermen SC Verdict: दिल्ली में एमसीडी (Municipal Corporation of Delhi) में एल्डरमैन की नियुक्ति पर हाल ही में एक महत्वपूर्ण फैसला सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्णय देते हुए एलजी वीके सक्सेना के पक्ष में फैसला सुनाया है कि उपराज्यपाल सरकार की सलाह के बिना एमसीडी में एल्डरमैन की नियुक्ति की जा सकती है। इससे पहले, अंतरिम सलाहकार एलजी द्वारा इस नियुक्ति की प्रक्रिया में खींचतान थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने समाप्त कर दिया है।एमसीडी में एल्डरमैन का पद नगर संसाधनों के प्रशासन और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इनकी नियुक्ति नगरीय प्रशासन और संगठन के स्तर पर की जाती है, जहां उन्हें नागरिकों के हितों की देखरेख करने और स्थानीय समस्याओं का समाधान करने का काम होता है।एमसीडी में एल्डरमैन की नियुक्ति के बारे में सामान्य जानकारी के रूप में, इन्हें लोकल निर्वाचनों के माध्यम से चुना जाता है। वे नगर क्षेत्र के विभिन्न वार्ड्स से उम्मीदवार बनकर चुने जाते हैं, और उनकी नियुक्ति स्थानीय निर्वाचन आयोग द्वारा स्वीकृति के बाद होती है।इस नए निर्णय से सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि एलडरमैन की नियुक्ति में उपराज्यपाल सरकार की सलाह की जरूरत नहीं होती, जिससे इस पद की नियुक्ति की प्रक्रिया स्थानीय प्रशासन को आसान हो जाएगी।

LG कैसे नियुक्त करते हैं एल्डरमैन?

एलजी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने जरूरी बातें कहीं। जस्टिस नरसिम्हा ने कहा कि दिल्ली नगर निगम अधिनियम की धारा 3(3)(बी) में कहा गया है कि उपराज्यपाल 25 वर्ष से कम नहीं और नगरपालिका प्रशासन में विशेष ज्ञान या अनुभव वाले 10 व्यक्तियों को नामित कर सकता है। उन्होंने कहा कि यह सुझाव गलत है कि दिल्ली में उपराज्यपाल की शक्ति एक शब्दार्थिक लॉटरी थी। यह संसद द्वारा बनाया गया कानून है, यह उपराज्यपाल द्वारा प्रयोग किए गए विवेक को पूरा करता है क्योंकि कानून उसे ऐसा करने के लिए कहता है और अनुच्छेद 239 के अपवाद के अंतर्गत आता है। यह 1993 का डीएमसी अधिनियम था जिसने पहली बार उपराज्यपाल को नामित करने की शक्ति दी थी और यह अतीत की कोई विरासत नहीं है।न्यायाधीश ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की एक बेंच ने पहले ही फैसला सुनाया था कि संसद दिल्ली की राज्य और समवर्ती सूचियों पर कानून बना सकती है। उन्होंने कहा कि चूंकि संसद ने उपराज्यपाल को 10 एल्डरमैन नामित करने की शक्ति दी है, इसलिए आप सरकार इसका विरोध नहीं कर सकती।

डी वाई चंद्रचूड़ ने क्या कहा?

सीजेआई डी वाई चंद्रचूड़ ने फैसला सुनाते हुए कहा कि एमसीडी में सदस्यों को नामित करने की शक्ति के साथ, एलजी लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित एमसीडी को प्रभावी रूप से अस्थिर कर सकते है। यह इस तथ्य के आलोक में था कि सदस्यों को स्थायी समितियों में नियुक्त किया जाता है और उनके पास मतदान करने की शक्ति होती है। बता दें कि प्रधान न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला की पीठ ने पिछले साल इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

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